GRT ग्रुप ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम के तहत TANKER फाउंडेशन को 25 लाख रुपये दान किए। यह मदद किडनी रोग से जूझ रहे वंचित रोगियों को ट्रांसप्लांट और डायलिसिस सुविधा प्रदान करने में सहायक होगी।

चेनई, 9 जुलाई 2026 – GRT ग्रुप ने अपने CSR पहल के हिस्से के रूप में TANKER फाउंडेशन को 25 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की। यह दान समूह के चेयरमैन जी. राजेंद्रन और प्रबंध निदेशक जी.आर. अनंतपदमनभन, जी.आर. राधाकृष्णन तथा जयश्री वुम्मिडी द्वारा एक विशेष कार्यक्रम में सौंपा गया।

टीएनकेर फाउंडेशन का मिशन

TANKER फाउंडेशन, जिसका पूरा नाम Transplant & Kidney Education Resources है, भारत में किडनी रोगियों के लिए जीवनरक्षक ट्रांसप्लांट और डायलिसिस सेवाओं को सुलभ बनाने पर केंद्रित है। 2003 में स्थापित यह गैर‑लाभकारी संस्था, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त या कम लागत पर उपचार उपलब्ध कराती है।

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का भारत में महत्व

2014 में लागू किए गए भारतीय कंपनी अधिनियम के अनुच्छेद 135 के तहत, सभी बड़े कंपनियों को वार्षिक 2% आय का CSR में निवेश करना अनिवार्य है। इस दिशा‑निर्देश ने स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में निजी‑सेक्टर की भागीदारी को तेज किया है। GRT ग्रुप ने अब तक 15 विभिन्न NGOs को कुल 8.5 करोड़ रुपये का समर्थन दिया है, जिससे उनका CSR पोर्टफोलियो देश के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

दान का प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ

25 लाख रुपये की राशि TANKER फाउंडेशन को नई डायलिसिस मशीनें, रोगी सहायता कार्यक्रम और जागरूकता अभियानों के लिए उपयोग की जाएगी। प्रबंध ट्रस्टी लता ए. कुमारस्वामी ने कहा, "यह सहयोग हमारे मिशन को तेज गति देगा और अधिक रोगियों को समय पर उपचार प्रदान करेगा।" इस दान के माध्यम से, GRT ग्रुप न केवल अपने सामाजिक दायित्व को पूरा कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी‑सेक्टर की सक्रिय भूमिका को भी सुदृढ़ कर रहा है।

भविष्य की दिशा

जैसे-जैसे किडनी रोग का प्रसार भारत में बढ़ रहा है, ऐसे सहयोगी मॉडल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को व्यापक बनाने में अहम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक कंपनियों को CSR के तहत स्वास्थ्य‑संबंधी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रोगी देखभाल में सुधार होगा।