नवो नॉर्डिस्क ने भारत में पहली बार साप्ताहिक बेसल इंसुलिन Awiqli लॉन्च किया। यह दवा रोज़ाना के 365 इंजेक्शन को घटाकर केवल 52 बार बनाती है, पर विशेषज्ञ कहते हैं कि यह सभी रोगियों के लिए नहीं है।

लगभग 104 वर्षों के बाद, जब दैनिक इंसुलिन शॉट्स ने मधुमेह के इलाज में क्रांति ला दी थी, भारत में पहली बार साप्ताहिक इंसुलिन विकल्प उपलब्ध हुआ है। डैनिश फार्मास्यूटिकल दिग्गज नवो नॉर्डिस्क ने Awiqli (इन्सुलिन इकोडेक) को भारतीय बाजार में पेश किया, जो टाइप‑1 और टाइप‑2 दोनों डायबिटीज़ वाले वयस्कों के लिए बेसल इंसुलिन के रूप में काम करता है।

इतिहास और पृष्ठभूमि

डायबिटीज़ के इतिहास में इंसुलिन का परिचय 1922 में हुआ था, और तब से दैनिक इंजेक्शन ही मानक उपचार रहा है। भारत में अनुमानित 1.01 करोड़ लोग डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं, जबकि 1.36 करोड़ लोग प्री‑डायबिटिक स्थिति में हैं। इस बड़े रोगी समूह के लिए इंजेक्शन की भयावहता, विशेषकर रोज़ाना की सुई‑लगाने की चिंता, अक्सर उपचार की शुरुआत में सात‑नौ साल की देरी का कारण बनती है।

नवो नॉर्डिस्क का दावा

क्लिनिकल परीक्षणों में 4,000 से अधिक वयस्कों, जिनमें भारतीय प्रतिभागी भी शामिल थे, ने दिखाया कि Awiqli HbA1c स्तर में दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में बेहतर गिरावट लाता है। कंपनी का कहना है कि साप्ताहिक दवा रोगियों को 365 से घटाकर केवल 52 बार इंजेक्शन करवाकर जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकती है।

डॉक्टरों की प्रतिक्रिया

दिल्ली स्थित एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. अनुज मिश्रा ने कहा, “कम सुई लगाना एक बड़ा कदम है; दो दशकों से बेसल इंसुलिन में नवाचार की कमी रही है, और यह नया विकल्प रोगियों को इंसुलिन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।” दूसरी ओर, लिलावती अस्पताल के डॉ. शशांक जोशी ने चेतावनी दी कि रोगियों को अभी भी नियमित ग्लूकोज मॉनिटरिंग की जरूरत होगी, और यह दवा उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो तकनीक का उपयोग करके अपनी बीमारी का प्रबंधन कर सकते हैं।

कौन से रोगियों को फायदा हो सकता है?

KEM अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. तुशार बंधगार, जिन्होंने भारतीय परीक्षण केंद्रों में से एक का नेतृत्व किया, ने बताया कि यह दवा उन रोगियों के लिए सबसे फायदेमंद है जो अभी भी कुछ हद तक अपना स्वयं का इंसुलिन उत्पन्न कर रहे हैं और केवल बेसल इंसुलिन की आवश्यकता है। “जो लोग दिन में कई बार इंसुलिन लेते हैं, उनके लिए यह विकल्प उतना प्रभावी नहीं हो सकता,” उन्होंने कहा।

भविष्य की दिशा

डॉ. बंधगार ने यह भी उजागर किया कि GLP‑1 रेसेप्टर एगोनिस्ट और वजन घटाने वाली दवाएँ पहले से ही कई रोगियों में इंसुलिन की आवश्यकता को घटा रही हैं। “साप्ताहिक इंसुलिन एक महत्वपूर्ण प्रगति है, पर बेसल इंसुलिन की जरूरत वाले रोगियों की संख्या धीरे‑धीरे घट सकती है,” उन्होंने कहा। इस प्रकार, Awiqli को एक पूरक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, न कि सभी के लिए सार्वभौमिक समाधान।