केरल की जन्म दर 2024 में 9.64 तक गिरकर अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई। दो लगातार वर्षों में इस गिरावट की तीव्रता ने राज्य की जनसंख्या संरचना में संभावित संकट का संकेत दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केरल की CBR 2024 में 9.64 तक गिर गई
- लगातार दो साल में सबसे तेज गिरावट दर्ज
- उत्तरी और दक्षिणी जिलों में जन्म दर में बड़ा अंतर
केरल का शुद्ध जन्म दर (CBR) 2024 की आधिकारिक रिपोर्ट में पहली बार दो अंकों से नीचे गिरकर 9.64 दर्ज हुई, जबकि 2023 में यह 11.06 था। CBR का अर्थ है प्रति 1,000 जनसंख्या में जीवित जन्मों की संख्या, और यह संकेतक राज्य के जनसंख्या वृद्धि के भविष्य को समझने में महत्वपूर्ण है।
पिछले दशकों की तुलना में तीव्र गिरावट
1992 से लेकर 2024 तक के आंकड़ों की समीक्षा करने पर स्पष्ट होता है कि 1992 में CBR 17.67 था और 2016 तक धीरे-धीरे 14.48 तक गिरा। 2022 में COVID-19 महामारी के बाद अस्थायी बढ़ोतरी के बाद, 2023‑24 में 1.42 की गिरावट और 2022‑23 में 1.47 की गिरावट ने दो लगातार सबसे तेज गिरावट की रिकॉर्ड बना दी। यह प्रवृत्ति केरल के जनसंख्या परिवर्तन को तेज करती दिखाती है, जिससे उम्र‑वृद्धि और श्रम शक्ति में कमी जैसी चुनौतियों का जोखिम बढ़ रहा है।
क्षेत्रीय असमानताएँ
जिला‑स्तर पर जन्म दर में स्पष्ट उत्तर‑दक्षिण विभाजन देखा गया। अलप्पुझा (CBR 5.28) सबसे कम दर वाले जिले में है, जबकि कोल्लम (6.63) उसके बाद आता है। उत्तर के जिलों—मलप्पुरम् (15.16), कोज़िकोड, वायनाड और कन्नूर—में सभी की CBR 10 से ऊपर है, जो सामाजिक‑आर्थिक एवं स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता में असमानताओं को उजागर करता है।
मृत्युदर की स्थिरता और संभावित प्रभाव
शुद्ध मृत्युदर (CDR) महामारी के बाद 2024 में 8.77 पर स्थिर रहा, जो 2023 के 8.59 से थोड़ा बढ़ा। हालांकि यह वृद्धि मामूली है, लेकिन कोट्टायाम जैसे जिलों में 12.39 की उच्चतम दर ने स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता पर प्रश्न उठाए हैं। जन्म दर में गिरावट के साथ मृत्यु दर की स्थिरता जनसंख्या वृद्धावस्था को तेज कर सकती है, जिससे पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल और कार्यबल की उपलब्धता पर दबाव पड़ेगा।
भविष्य की दिशा‑निर्देश
केरल को अब जनसंख्या नीति में पुनः विचार करने की आवश्यकता है—जैसे प्रजनन सहायता, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, और वृद्ध जनसंख्या के लिए सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क का विस्तार। यदि इस गिरावट को अनदेखा किया गया तो राज्य को आर्थिक विकास में बाधा और सामाजिक संरचना में असंतुलन का सामना करना पड़ सकता है।