मुख्य मंत्री कार्यालय की रिपोर्ट में चेन्नई के सरकारी अस्पतालों में गंभीर स्टाफ की कमी, उपकरणों की खराबी और रोगियों से रिश्वत लेने की व्यापक शिकायतें सामने आई हैं। इन समस्याओं को हल करने के लिए कम लागत वाले कैंटीन, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों के लिए मुफ्त जगह प्रदान करने जैसी सिफ़ारिशें भी दी गई हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- स्टाफ की गंभीर कमी से रोगियों को लंबी प्रतीक्षा और कम गुणवत्ता वाली देखभाल
- इमेजिंग और आपातकालीन उपकरणों की अपर्याप्त उपलब्धता
- रोगियों से रिश्वत लेने की व्यापक रिपोर्ट, विशेषकर प्रसव एवं मृत्यु विभाग में
मुख्य मंत्री कार्यालय ने हाल ही में जारी एक विस्तृत नोट में चेन्नई के सरकारी अस्पतालों की कई बुनियादी कमियों को उजागर किया है। इस दस्तावेज़ में स्टाफ की कमी, उपकरणों की खराबी, बुनियादी सुविधाओं की कमी और भ्रष्टाचार के कई उदाहरणों को रेखांकित किया गया है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
स्टाफ की कमी और उसके प्रभाव
टामिलनाडु सरकार के मल्टी‑सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में केवल चार कार्डियोलॉजी डॉक्टर पाये गये, जबकि दैनिक 500‑600 हृदय रोगियों का उपचार होता है। इसी तरह, रॉयापेट्टाह जनरल अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों की संख्या असंतुलित है, जिससे कर्मचारियों को 12 घंटे तक काम करना पड़ता है और रोगियों के प्रति व्यवहार में गिरावट आती है। इस कमी के कारण कई रोगी निजी अस्पतालों में महँगा इलाज करवाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उपकरण की कमी और रख‑रखाव की समस्या
किलपाउक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दैनिक केवल 3‑4 रोगियों को ही एमआरआई स्कैन मिल पाता है, जबकि आपातकालीन मामलों को अन्य अस्पतालों में भेजना पड़ता है। रॉयापेट्टाह अस्पताल में एक्स‑रे मशीनें आठ महीने तक मरम्मत में रहीं, जिससे एक ही मशीन पर सभी रोगियों का इंतजार अत्यधिक बढ़ गया। इस प्रकार की उपकरण विफलता न केवल इलाज में देरी करती है, बल्कि रोगियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।
रिश्वतखोरी के व्यापक आरोप
प्रसव एवं बाल रोग विभागों में बाहरी स्टाफ द्वारा लम्बे समय तक काम करने के बदले रोगियों से रिश्वत वसूली की रिपोर्टें मिली हैं। किलपाउक अस्पताल में सफ़ाई एवं सुरक्षा कर्मियों ने 50 से 500 रुपये तक की रक़में लीं, जबकि मृत्युपर्यंत विभाग में लिंग के आधार पर अतिरिक्त शुल्क लिया गया। इन घटनाओं ने रोगियों में भय और असंतोष पैदा किया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसे को कमजोर करता है।
बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा और सुधार के सुझाव
बच्चों के स्वास्थ्य संस्थान में रेफ़्रिजरेटर की खराबी, बिजली लीकेज और आग का खतरा बना हुआ है, जबकि लिफ्टों की बार‑बार टूट‑फूट से रोगियों और स्टाफ दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान के तौर पर सरकार को कम लागत वाले कैंटीन स्थापित करने, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों को जूस व मिलेट‑आधारित खाद्य स्टॉल चलाने के लिए मुफ्त जगह देने, स्वच्छ पेयजल और टॉयलेट सुविधाओं के लिए पर्याप्त फंड आवंटित करने की सिफ़ारिश की गई है।