हैदराबाद में आयोजित ऑटिज़्म ओडिसी 3.0 सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि ऑटिज़्म केवल बचपन की बीमारी नहीं, बल्कि जीवन‑भर का विकासात्मक विकार है और इसके लिए शिक्षा, रोजगार, स्वतंत्र जीवन और वृद्धावस्था तक सतत समर्थन आवश्यक है। बहु‑विषयक सहयोग और परिवार‑केंद्री देखभाल मॉडल को सुदृढ़ करने की बात की गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ऑटिज़्म को आजीवन देखभाल की आवश्यकता है
- शिक्षा, रोजगार और वृद्धावस्था तक एकीकृत समर्थन जरूरी है
- बहु‑विषयक सहयोग और परिवार‑केंद्री मॉडल को सुदृढ़ किया जाना चाहिए
हैदराबाद के रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल के चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर ने दो‑दिन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “ऑटिज़्म ओडिसी 3.0” आयोजित किया, जिसमें ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के व्यापक देखभाल मॉडल पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में मारहम, अली यावर जंग राष्ट्रीय सुनवाई विकलांग संस्थान, भारतीय बाल रोग अकादमी और कई स्वैच्छिक संस्थाओं ने साझेदारी की।
ऑटिज़्म को जीवन‑भर का विकासात्मक स्थिति माना गया
सम्मेलन के मुख्य विषय ने यह रेखांकित किया कि ऑटिज़्म केवल बचपन की निदान नहीं, बल्कि एक जीवन‑भर चलने वाली स्थिति है। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रारंभिक निदान और बाल्यावस्था के हस्तक्षेप अहम हैं, परंतु किशोरावस्था, वयस्कता और वृद्धावस्था में निरंतर समर्थन की कमी से रोगियों की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
एकीकृत समर्थन प्रणाली की आवश्यकता
डॉ. प्रतिमा गिरी, विकासात्मक बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा, “ऑटिज़्म वाले व्यक्तियों को शिक्षा, रोजगार, रिश्ते, स्वतंत्र रहने और उम्र बढ़ने की सभी चरणों में सुदृढ़ प्रणाली की जरूरत है। यह बहु‑विषयक टीमों—स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, नीति‑निर्माताओं और NGOs—के सहयोग से संभव है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परिवार को देखभाल के केंद्र में रखा जाना चाहिए, क्योंकि वह सबसे भरोसेमंद समर्थन स्रोत है।
इतिहास और भविष्य की दिशा
भारत में ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता पिछले दो दशकों में काफी बढ़ी है, परंतु अभी भी नीति‑निर्माण में अंतराल मौजूद है। 2019 में राष्ट्रीय ऑटिज़्म नीति का मसौदा तैयार किया गया, लेकिन कार्यान्वयन में कई बाधाएं हैं। इस सम्मेलन ने सुझाव दिया कि राज्य‑स्तरीय योजनाओं को राष्ट्रीय मानकों के साथ संरेखित किया जाए और निजी‑सार्वजनिक साझेदारी के माध्यम से कार्यशालाएं, कौशल प्रशिक्षण और जीवन कौशल कार्यक्रम विस्तारित किए जाएँ।
समुदाय और निजी क्षेत्र की भूमिका
रेंबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल ने बताया कि वह अब सिर्फ निदान तक सीमित नहीं रहकर, दीर्घकालिक फॉलो‑अप, कार्यस्थल एकीकरण और वृद्धावस्था देखभाल के लिए विशेष इकाइयाँ स्थापित कर रहा है। यह मॉडल अन्य शहरों में दोहराने योग्य है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर ऑटिज़्म देखभाल का ढांचा सुदृढ़ होगा।