डॉ. रेडी लैबोरेटरीज ने सेमाग्लूटाइड की आपूर्ति को स्थगित कर दिया क्योंकि सक्रिय घटक (API) में गुणवत्ता त्रुटि पाई गई। इस कदम से कंपनी के शेयर लगभग 6% गिर गए और टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स ने कुछ बैचों की वापसी की घोषणा की।
हैदराबाद स्थित दवा निर्माता डॉ. रेडी लैबोरेटरीज ने 9 जुलाई को बताया कि उसके जेनेरिक सेमाग्लूटाइड की व्यावसायिक आपूर्ति को रोक दिया गया है। कारण बताया गया कि सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) में एक तकनीकी समस्या पाई गई है, जिसके कारण उत्पाद नियत मानकों से बाहर है। कंपनी ने कहा कि नई आपूर्ति अक्टूबर‑नवंबर के अंत में फिर से शुरू होगी।
सेमाग्लूटाइड का महत्व और बाजार पर असर
सेमाग्लूटाइड डैनिश दवा दिग्गज नोवो नॉर्डिस्क की प्रमुख मधुमेह और वजन घटाने वाली दवाओं – वेगोवी (Wegovy) और ओज़ेम्पिक (Ozempic) – का सक्रिय तत्व है। मार्च 2026 में इसके पेटेंट का अंत होने के बाद, कई भारतीय कंपनियों ने इस दवा का जेनेरिक संस्करण लॉन्च किया, जिनमें डॉ. रेडी प्रमुख था। इस दवा की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने वर्ष 2026 में 12 मिलियन इंजेक्शन पेन बेचने का लक्ष्य रखा था।
शेयर बाजार में प्रतिक्रिया और रीकॉल
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर डॉ. रेडी के शेयर लगभग 5.85% गिर कर ₹1,269.80 पर बंद हुए। साथ ही, टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स ने कंपनी के निर्देश पर कुछ बैचों के सेमालिक्स डिस्पोजेबल पेन की वैकल्पिक वापसी (voluntary recall) की घोषणा की। टोरेंट ने स्पष्ट किया कि यह रीकॉल केवल एक बैच से संबंधित है और इससे उत्पाद की सुरक्षा या अन्य बाजारों में आपूर्ति पर असर नहीं पड़ेगा।
कंपनी की प्रतिक्रिया और आगे की योजना
सीईओ एरेज़ इज़राइल ने बताया कि समस्या उत्पादन स्केल‑अप के दौरान एक अज्ञात अशुद्धि (impurity) के कारण उत्पन्न हुई। कंपनी अब मूल कारण की गहन जाँच कर रही है और उत्पादन प्रक्रिया में सुधार कर रही है। नई प्रक्रिया के पूर्ण मान्यकरण के बाद ही आपूर्ति फिर से शुरू होगी, जिससे भारत और कनाडा में उपलब्धता पर असर पड़ेगा। मौजूदा बाजार में उपलब्ध उत्पादों की सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं बताया गया।
भविष्य की संभावनाएँ
सेमाग्लूटाइड की अपेटाइट‑सuppressant प्रभाव को देखते हुए, भारत में मोटापे के इलाज में इसका महत्व बढ़ रहा है। यदि डॉ. रेडी की आपूर्ति में देरी जारी रही, तो अन्य स्थानीय निर्माताओं को इस अंतर को भरने का अवसर मिल सकता है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और कीमतें प्रभावित होंगी। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि नियामक मानकों की कड़ाई से पालन न करने वाले उद्यमों को बाजार में जोखिम का सामना करना पड़ता है।