केंद्रीय आर्थिक मामलों की समिति ने सेमिकॉन मिशन 2.0 के लिये 1.27 लाख करोड़, मोबाइल फ़ोन निर्माण योजना के लिये 62,500 करोड़ और वाराणसी में दो हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिये 25,400 करोड़ रुपये अनुमोदित किए। साथ ही 10 मिलियन टन क्षमता वाले नौ नई गैस‑आधारित यूरिया प्लांट्स की मंज़ूरी दी गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सेमिकॉन मिशन 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये आवंटित
- मोबाइल फ़ोन निर्माण योजना (MPMS) के लिए 62,500 करोड़ रुपये
- वाराणसी में दो हाईवे परियोजनाओं के लिए 25,400 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने भारत के औद्योगिक भविष्य को आकार देने वाली कई महत्त्वपूर्ण पहलों को स्वीकृति दी। इन कदमों में सेमिकॉन मिशन 2.0, मोबाइल फ़ोन निर्माण योजना (MPMS) और वाराणसी‑केन्द्रित दो बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स प्रमुख हैं। साथ ही, राष्ट्रीय निवेश नीति‑2026 के तहत नौ गैस‑आधारित यूरिया प्लांट्स की स्थापना को भी मंज़ूरी मिली, जिससे देश की कृषि‑उत्पादकता को बूस्ट मिलेगी।
सेमिकॉन मिशन 2.0: भारत को चिप आत्मनिर्भर बनाने की राह
पहले चरण में 76,000 करोड़ रुपये निवेश के बाद, सरकार ने अब सेमिकॉन मिशन के दूसरे संस्करण के लिये 1.27 लाख करोड़ रुपये की बड़ी बजट राशि निर्धारित की है। लक्ष्य 4 लाख करोड़ रुपये के कुल विदेशी निवेश को आकर्षित करना और दो लाख करोड़ रुपये की चिप उत्पादन मूल्य हासिल करना है। इस मिशन में सिलिकॉन, गैस, खनिज आदि कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला देश में ही स्थापित हो सके। वर्तमान में विश्व में मेमोरी चिप की कमी के कारण कीमतें बढ़ी हैं, और भारत इस अवसर का उपयोग करके एआई‑ड्रिवन डिवाइसों हेतु आवश्यक उन्नत चिप्स का उत्पादन कर सकता है।
मोबाइल फ़ोन निर्माण योजना (MPMS): स्थानीय ब्रांडों को सशक्त बनाना
MPMS के लिये 62,500 करोड़ रुपये का बजट घोषित किया गया, जो भारतीय मोबाइल ब्रांडों को तकनीकी स्वाधीनता प्रदान करने हेतु डिज़ाइन, अनुसंधान एवं विकास (R&D) में अतिरिक्त प्रोत्साहन देगा। योजना के तहत 2.25%‑5% तक की बिक्री‑आधारित प्रोत्साहन दरें और स्थानीय घटकों के उपयोग पर अतिरिक्त 1.5% की छूट दी जाएगी। अनुमानित है कि इस पहल से कुल मोबाइल उत्पादन का मूल्य लगभग 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा और 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इस कदम से भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थिति को और मजबूत किया जाएगा।
वाराणसी हाईवे परियोजनाएँ: कंकड़‑भरी सड़कों को तेज़ी से सुलझाना
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा दो हाईवे प्रोजेक्ट्स को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर कार्यान्वित किया जाएगा। पहला, 43.218 किमी का कॉरिडोर NH‑31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ता है और इसका कुल खर्च 10,998.32 करोड़ रुपये है। दूसरा, 46.039 किमी का कॉरिडोर NH‑19 को गंगा‑तट रिंग रोड से जोड़ता है, जिसकी लागत 14,447.64 करोड़ रुपये है। दोनों परियोजनाएँ 80‑100 किमी/घंटा के गति सीमा के साथ डिजाइन की गई हैं, जिससे यात्रा समय लगभग आधा हो जाएगा। यह वाराणसी डी‑कोंजेशन प्लान और प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत शहर की लॉजिस्टिक क्षमता, पर्यटन और धार्मिक यात्रा को बढ़ावा देगा।
नवीन यूरिया प्लांट्स: कृषि विकास में नई ऊर्जा
नया राष्ट्रीय निवेश नीति‑2026 (NIPU‑2026) नौ गैस‑आधारित यूरिया प्लांट्स की स्थापना को मंज़ूरी देता है, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 10 मिलियन टन है। यह पहल न केवल उर्वरक की घरेलू उपलब्धता को बढ़ाएगी, बल्कि निर्यात क्षमता को भी सुदृढ़ करेगी, जिससे भारत की कृषि निर्यात आय में वृद्धि की संभावना है।
इन सभी पहलों का सामूहिक प्रभाव भारतीय उद्योग, रोजगार और बुनियादी ढाँचे पर दीर्घकालिक रूप से सकारात्मक रहेगा, जबकि वैश्विक आपूर्ति‑शृंखला चुनौतियों के सामने देश की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाएगा।