प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स और उसके प्रमोटरों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹158.37 करोड़ की अचल संपत्ति कुर्क की है। इस घोटाले में फर्जी इम्प्लांट बिल और निर्माण लागत में हेराफेरी के गंभीर आरोप हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ED ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स के खिलाफ ₹158.37 करोड़ की संपत्ति कुर्क की।
  • घोटाले में ₹76.03 करोड़ के फर्जी इम्प्लांट इनवॉइस और ₹82.34 करोड़ की निर्माण लागत में हेराफेरी शामिल है।
  • यह कार्रवाई SFIO की 2020 की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच का परिणाम है।
  • आरोपियों ने शेल कंपनियों और फर्जी एंट्री ऑपरेटरों का उपयोग करके धन को छिपाने का प्रयास किया।

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने जांच के दौरान अपराध की कमाई (proceeds of crime) के रूप में चिह्नित लगभग ₹158.37 करोड़ की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

घोटाले का तरीका: फर्जी बिल और बढ़ी हुई लागत

ED की जांच में रॉकलैंड हॉस्पिटल्स द्वारा धन के गबन के लिए अपनाए गए दो मुख्य तौर-तरीकों (modus operandi) का खुलासा हुआ है। एजेंसी के अनुसार, पहला तरीका 71 फर्जी कंपनियों के माध्यम से ₹76.03 करोड़ के नकली इम्प्लांट इनवॉइस तैयार करना था। दूसरा तरीका अस्पताल के निर्माण की लागत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना था, जिसमें Somya Constructions Private Limited नामक एक संबंधित इकाई के माध्यम से ₹82.34 करोड़ की हेराफेरी की गई।

SFIO की जांच और कानूनी पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला 31 जनवरी, 2020 को सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा दिल्ली की विशेष अदालत (कंपनी अधिनियम) में दर्ज की गई एक शिकायत से शुरू हुआ था। SFIO ने अस्पताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया था, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच तेज की।

शेल कंपनियों का जाल

जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने अवैध धन के स्रोत को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए 'अकोमोडेशन एंट्री ऑपरेटरों' और कई शेल संस्थाओं (Shell Entities) का सहारा लिया। हालांकि, रॉकलैंड हॉस्पिटल्स के प्रतिनिधियों ने पूर्व में इन सभी आरोपों का खंडन किया है और कानूनी लड़ाई जारी है। यह मामला स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।