गौतम अडानी ने शपथपत्र में कहा कि वह अमेरिकी आपराधिक अभियोग को रद्द करने से जुड़ी किसी भी प्रतिज्ञा या समझौते से अनभिज्ञ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि $10 अरब का अमेरिकी निवेश योजना आधिकारिक तौर पर 13 नवंबर 2024 को घोषित की गई थी, इससे पहले कि अभियोग का खुलासा हुआ।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अडानी ने अमेरिकी केस रद्दीकरण से जुड़े किसी भी सौदे को अस्वीकार किया
  • न्याय विभाग ने 2024 के आरोपों को स्थायी रूप से बंद कर दिया
  • अडानी समूह का $10 बिलियन निवेश योजना केस से स्वतंत्र रही

गौतम अडानी ने एक शपथपत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि वह अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक अभियोग को रद्द करने से जुड़ी किसी भी प्रतिज्ञा, प्रस्ताव या समझौते से अनभिज्ञ हैं। यह बयान 15 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के आदेश के बाद दायर किया गया, जिसमें अडानी से पूछताछ की गई थी कि क्या उन्होंने किसी प्रकार के बदले में लाभ की उम्मीद की थी।

पृष्ठभूमि और आरोप

2024 में, बिडेन प्रशासन के तहत अमेरिकी न्याय विभाग ने अडानी और सात अन्य व्यक्तियों पर लगभग $250 मिलियन के रिश्वत भत्ते के आरोप लगाए थे, जिसमें भारतीय अधिकारियों को बिजली आपूर्ति अनुबंध दिलाने और अमेरिकी निवेशकों को भ्रामक जानकारी देने का दावा किया गया था। इन आरोपों के कारण अडानी समूह के शेयरों में तेज गिरावट आई, जिससे लगभग ₹2.85 लाख करोड़ की बाजार पूंजीकरण क्षति हुई।

अभियोग रद्दीकरण की प्रक्रिया

अमेरिकी DOJ ने बाद में इस मामले को “कानूनी और प्रमाणिक चुनौतियों” के कारण स्थायी रूप से रद्द करने का प्रस्ताव रखा। प्रमुख अधिवक्ता रेट्रेंट मैककोटर ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय अमेरिकी निवेश या किसी भी संभावित $10 अरब निवेश योजना से स्वतंत्र था। उन्होंने कहा कि “केस को रद्द करने का कारण किसी भी निवेश के वादे से नहीं, बल्कि अभियोग की कमजोरियों से था।”

अडानी समूह की अमेरिकी निवेश योजना

अडानी ने कहा कि समूह की $10 अरब का अमेरिकी निवेश योजना 13 नवंबर 2024 को सार्वजनिक रूप से घोषित की गई थी, जो कि अभियोग के सार्वजनिक होने से पहले की तारीख है। उनके कानूनी सलाहकार, सुलिवन एंड क्रॉमवेल LLP, ने DOJ और SEC के अधिकारियों के साथ कई मीटिंग्स कीं, जिसमें श्वेतपत्र, विशेषज्ञ रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ प्रस्तुत किए गए। हालांकि, DOJ ने स्पष्ट किया कि यह निवेश योजना रद्दीकरण के निर्णय में कोई भूमिका नहीं निभाई।

भविष्य की संभावनाएँ

अडानी समूह के लिए यह विकास दोहरी महत्ता रखता है: एक ओर यह कानूनी स्पष्टता प्रदान करता है, और दूसरी ओर यह अमेरिकी बाजार में भविष्य के निवेश को सुगम बनाता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नियामकों की निगरानी बढ़ी हुई है, और किसी भी संभावित “क्विड‑प्रो‑को” के संकेत को कड़ी जांच का सामना करना पड़ेगा। इस संदर्भ में, अडानी की शपथपत्रीय घोषणा भारतीय और अमेरिकी दोनों निवेशकों के बीच भरोसा पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।