तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) ने भारत टेक्स 2026 में CITI‑UNIDO सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर पहल पुरस्कार हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय वस्त्र उद्योग में स्थिरता, नवाचार और सामाजिक प्रभाव के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • TEA को CITI‑UNIDO सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर पहल पुरस्कार मिला
  • CITI ने स्थिरता, जिम्मेदार सोर्सिंग और संसाधन दक्षता को प्रोत्साहित किया
  • SLCP के साथ सहयोग से MSME‑यों को मानव अधिकार एवं सतत प्रथाओं में समर्थन मिलेगा

कोयम्बटूर – 16 जुलाई, 2026 को आयोजित भारत टेक्स 2026 में, कॉन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने अपने वार्षिक CITI टेक्सटाइल सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड्स का समारोह संपन्न किया। इस मंच पर तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) ने "CITI‑UNIDO Best Cluster Initiative Towards Sustainable Textile Production" पुरस्कार जीता, जिससे भारतीय वस्त्र क्षेत्र में सतत उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम स्थापित हुआ।

इवेंट का महत्व और प्रमुख उपस्थित लोग

इस समारोह में केंद्रीय वस्त्र एवं विदेश मामलों के राज्य मंत्री पाबित्रा मार्घेरिटा, वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, UNIDO प्रतिनिधि, तथा वैश्विक उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही, CITI चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने अपनी प्रस्तुति में बताया कि CITI का लक्ष्य त्रि‑आधार (त्रिपल बॉटम लाइन) दृष्टिकोण अपनाकर उद्योग के सभी हितधारकों को एक साथ लाना है, जिससे नवाचार, सहयोग और नेतृत्व को प्रोत्साहन मिले।

सततता के लिए CITI की रणनीति

CITI ने सामाजिक एवं श्रम अभिसंधान कार्यक्रम (SLCP) के साथ साझेदारी की घोषणा की। यह पहल MSME‑यों को बदलते हुए स्थिरता मानकों, जिम्मेदार व्यापारिक प्रथाओं और मानवाधिकार ड्यू डिलिजेंस की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगी। SLCP एक बहु‑हितधारक मंच है, जिसमें ब्रांड, निर्माता, उद्योग संघ, नागरिक समाज और ऑडिट फर्म्स शामिल होते हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन में उचित कार्य स्थितियों को बढ़ावा देते हैं।

पुरस्कारों की दो मुख्य श्रेणियाँ

समारोह में दो प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार वितरित किए गए: पहला, CITI टेक्सटाइल सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड, जिसमें जलवायु‑सहज कपास उत्पादन, कस्तूरी कपास को बढ़ावा, सर्कुलर इकोनॉमी, ऊर्जा दक्षता, क्लस्टर विकास, एचआर उत्कृष्टता और शैक्षणिक योगदान को मान्यता मिली। दूसरा, CITI बर्ला इकोनॉमिक & टेक्सटाइल रिसर्च फाउंडेशन अवॉर्ड, जो रासायनिक प्रबंधन और गीले प्रसंस्करण में अनुपालन को सराहता है।

TEA की जीत का प्रभाव

TEA की जीत न केवल तिरुप्पुर क्षेत्र के वस्त्र निर्यातकों के लिए गर्व का कारण है, बल्कि यह दर्शाता है कि छोटे और मध्यम उद्यम (MSMEs) भी स्थायी उत्पादन मॉडल अपनाकर वैश्विक मानकों पर खरे उतर सकते हैं। इस पहल से अन्य क्लस्टर को भी पर्यावरण‑अनुकूल तकनीकों, ऊर्जा‑संचय उपायों और सामाजिक उत्तरदायित्व वाले प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। भविष्य में, ऐसी मान्यता भारतीय वस्त्र उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।