भारत और यूके के बीच लागू हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) तेलंगाना के टेक्सटाइल, कृषि और फार्मा उद्योगों के लिए नए द्वार खोलेगा। इससे हैदराबाद में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की भी संभावना बढ़ेगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत-यूके CETA के लागू होने से तेलंगाना के कपड़ा और कृषि उत्पादों की मांग में भारी वृद्धि होगी।
- हैदराबाद में ब्रिटिश कंपनियों द्वारा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित करने की प्रबल संभावना है।
- टैरिफ में कटौती से फार्मास्युटिकल, लाइफ साइंसेज और डिफेंस सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा।
- योग शिक्षकों, शेफ और शास्त्रीय संगीतकारों के लिए विशेष वीजा प्रावधान किए गए हैं।
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हाल ही में लागू हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) तेलंगाना की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने जा रहा है। 15 जुलाई से प्रभावी हुए इस समझौते के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल तेलंगाना के पारंपरिक कपड़ा क्षेत्रों, बल्कि कृषि और समुद्री उत्पादों की मांग में भी जबरदस्त उछाल आएगा।
कपड़ा और कृषि क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक मंच
ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन के अधिकारियों के अनुसार, वारंगल और मंगलगिरी जैसे कपड़ा बेल्ट को इस समझौते से सीधा लाभ मिलेगा। यूके के बड़े रिटेलर्स जैसे Marks and Spencers और Tesco अब कम टैरिफ के कारण भारतीय पारंपरिक कपड़ों और वस्त्रों की अधिक सोर्सिंग कर सकते हैं। यह न केवल भारतीय प्रवासियों की मांग को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक फैशन हाउसों को भी तेलंगाना के समृद्ध टेक्सटाइल की ओर आकर्षित करेगा।
आईटी, फार्मा और रक्षा क्षेत्र में नए अवसर
यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। तेलंगाना के आईटी और उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने संकेत दिया है कि हैदराबाद में ब्रिटिश कंपनियों द्वारा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित करने की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा, फार्मास्युटिकल और लाइफ साइंसेज क्षेत्र में टैरिफ में कमी से अनुसंधान और विकास (R&D) के नए रास्ते खुलेंगे। रक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में भी सटीक इंजीनियरिंग (Precision Engineering) के माध्यम से सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
सांस्कृतिक और पेशेवर विनिमय
एक महत्वपूर्ण पहलू सांस्कृतिक विनिमय का भी है। समझौते के तहत, योग शिक्षकों, शेफ और शास्त्रीय संगीतकारों के लिए प्रति वर्ष 1,800 विशेष वीजा उपलब्ध होंगे, जो दोनों देशों के बीच सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। तेलंगाना सरकार अब इस समझौते का लाभ उठाने के लिए स्थानीय उद्योगों में जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि मौजूदा ₹3,553 करोड़ के निर्यात को कई गुना बढ़ाया जा सके।