पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर गईं, जिससे भारतीय शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट देखने को मिली। 30-शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 512.07 अंक गिरकर 75,869.38 पर आ गया, जबकि 50-शेयरों वाला NSE निफ्टी 153 अंक की गिरावट के साथ 23,713.60 पर बंद हुआ।

मुख्य बातें

  • कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार, भू-राजनीतिक तनाव जिम्मेदार।
  • BSE सेंसेक्स 512 अंक और NSE निफ्टी 153 अंक गिरा।
  • इंटरग्लोब एविएशन और इंफोसिस जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹2,999 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे।
  • वैश्विक बाजारों में भी व्यापक गिरावट दर्ज की गई।

शुक्रवार, 24 जुलाई, 2026 को भारतीय शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण आंकड़े को पार कर गईं। इस वैश्विक अनिश्चितता का सीधा असर घरेलू सूचकांकों पर पड़ा, जिससे निवेशकों में चिंता फैल गई।

मुंबई में, 30-शेयरों वाला बेंचमार्क BSE सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 512.07 अंक यानी 0.67% गिरकर 75,869.38 पर आ गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50-शेयरों वाला निफ्टी भी 153 अंक यानी 0.64% की गिरावट के साथ 23,713.60 पर पहुंच गया। इस गिरावट ने पिछले दिनों की मामूली बढ़त को भी मिटा दिया, जब सेंसेक्स गुरुवार को 363.66 अंक और निफ्टी 126.65 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए थे।

कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव

कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण हुआ है। विशेष रूप से, ईरान समर्थित हوثियों द्वारा लाल सागर में सऊदी टैंकरों पर हमले ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.03% की मामूली गिरावट के साथ 100.7 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो दर्शाता है कि कीमतें अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई हैं।

सेंसेक्स पैक से, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो की मूल कंपनी), ईटरनल, भारती एयरटेल, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और ट्रेंट प्रमुख रूप से पिछड़ गए। इंडिगो के लिए जून में समाप्त हुई तीन महीने की अवधि में 238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज करने के बाद इंटरग्लोब एविएशन में 2% से अधिक की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण उच्च ईंधन की कीमतें और पश्चिम एशिया संघर्ष था। आईटी सेवा कंपनी इंफोसिस भी 1% से अधिक गिर गई, क्योंकि उसने व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के बीच अपने पूरे साल के राजस्व पूर्वानुमान को 1.5% से 3% के बीच संशोधित किया। हालांकि, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और सन फार्मा जैसे कुछ शेयरों में बढ़त देखी गई।

वी.के. विजयकुमार, मुख्य निवेश रणनीतिकार, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड ने कहा, "बाजारों में कुल अनिश्चितता और उच्च अस्थिरता तत्काल राहत के किसी भी संकेत के बिना जारी है। लाल सागर में ईरान समर्थित हौथियों द्वारा सऊदी टैंकरों पर हमला ब्रेंट क्रूड के हालिया तेज उछाल का मुख्य कारण है, जो लगभग $100 तक पहुंच गया है। इतनी उच्च कीमत से भारत की भुगतान संतुलन संबंधी चिंताएं फिर से जीवित होना तय है।"

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी तेल आयात पर अत्यधिक निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करती हैं। उच्च तेल की कीमतें न केवल आयात बिल को बढ़ाती हैं, जिससे देश का व्यापार घाटा बढ़ सकता है, बल्कि यह रुपये पर भी दबाव डालती हैं और घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती हैं। यह कंपनियों की परिचालन लागत को बढ़ाता है, जिससे उनके लाभ मार्जिन पर असर पड़ता है और अंततः शेयर बाजार में गिरावट आती है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता निवेशकों के विश्वास को कमजोर करती है, जिससे पूंजी का बहिर्प्रवाह होता है, जैसा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा गुरुवार को ₹2,999.23 करोड़ के इक्विटी ऑफलोडिंग से स्पष्ट है।

क्या आप जानते हैं?: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिससे यह वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।

वैश्विक बाजारों पर प्रभाव

भारतीय बाजारों में गिरावट वैश्विक रुझानों के अनुरूप थी। एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.56% गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी निचले स्तर पर कारोबार कर रहे थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?
  • भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक तेल बाजारों को कैसे प्रभावित करता है?