फेडरल रिजर्व ने नीति दर को अपरिवर्तित रखा, जिससे डॉव जोन्स, नास्डैक और एसएंडपी‑500 सभी में तेज़ गिरावट आई। इस निर्णय ने डॉलर को भी कमजोर किया और वैश्विक तेल कीमतों को उछाल दिया।

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मुख्य बिंदु

  • फेड ने नीति दर 3.5%-3.75% पर स्थिर रखी
  • डॉव जोन्स 2.19% (1153 अंक) गिरा
  • डॉलर इंडेक्स 101 के नीचे बंद हुआ

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने 29 जुलाई को दो‑दिवसीय बैठक के बाद नीति दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय बताया। यह चौथा लगातार निर्णय है जिसमें ब्याज दरें स्थिर रही, जबकि महंगाई लक्ष्य 2% से ऊपर बनी हुई है।

निर्णय की घोषणा के बाद वॉल स्ट्रीट में तेज़ गिरावट देखी गई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरज ने 2.19% यानी 1153 अंक की गिरावट दर्ज की और 51,594 पर बंद हुआ। NASDAQ ने 1.74% (434 अंक) गिरते हुए 24,443 पर समाप्त किया, जबकि S&P‑500 1.52% (112 अंक) गिरकर 7,316 पर समाप्त हुआ।

डॉलर इंडेक्स भी दो दिन लगातार कमजोर चलकर 101 के नीचे बंद हुआ, जबकि 30‑साल की बॉन्ड यील्ड 5.2% के पार पहुंच गई, जो 2007 के बाद का सबसे हाई स्तर है। इस साथ ही, मध्य‑पूर्व में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल को छू गई।

Historical Background

पिछले पाँच वर्षों में फेड ने कई बार दरें बढ़ाई, लेकिन 2024 के बाद महंगाई में कमी न देखी जाने पर नीति दर को स्थिर रखने की प्रवृत्ति बढ़ी। 2022 में 5% से 4.75% तक की वृद्धि के बाद, 2023 में कई बार 0.25% की वृद्धि रद्द कर दर को 3.5%-3.75% पर रखा गया। इस स्थिरता ने निवेशकों को आशा दी, पर बाजार की अस्थिरता फिर भी बनी रही।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that a prolonged period of unchanged rates amid high inflation can trigger market volatility, pressuring both equity and bond markets while amplifying currency fluctuations.

"स्थिर दरें लंबे समय तक महंगाई को नियंत्रित नहीं कर पातीं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है," वित्तीय विशेषज्ञ डॉ. अनीता सिंह ने कहा।
Did You Know?: 2008 की वित्तीय संकट के बाद फेड ने पहली बार 10‑साल के बॉन्ड यील्ड को 5% से ऊपर ले जाया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या फेड की यह स्थिर दर नीति भविष्य में फिर से बदल सकती है?

उत्तर: हाँ, फेड आर्थिक डेटा के आधार पर दरें बढ़ा या घटा सकता है।

प्रश्न 2: इस गिरावट का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: विदेशी निवेश और डॉलर की कमजोरी भारतीय बाजार में पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकती है।