मुंबई में 3 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार ने अपने चार लगातार बढ़त को जारी रखा। बेंगलुरु स्टॉक एक्सचेंज (सेन्सेक्स) 0.70% बढ़कर 78,639 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 1.6% उछल कर 24,774 अंक पर पहुँचा।
Key Takeaways
- सेन्सेक्स 0.70% बढ़कर 78,639 अंक पर बंद हुआ।
- निफ्टी 1.6% उछलकर 24,774 अंक पर समाप्त हुआ।
- तेल की कीमतों में 4% से अधिक गिरावट से निवेशक भावना में उछाल आया।
3 अगस्त, 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे दिन लाभ में बंद किया। बेंगलुरु स्टॉक एक्सचेंज (सेन्सेक्स) ने 544.39 अंक की बढ़ोतरी कर 78,639.03 अंक पर पहुंचा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (निफ्टी) ने 390.70 अंक बढ़कर 24,774.30 अंक पर समाप्त हुआ, अर्थात् 1.60% की बढ़ोतरी।
रैली के प्रमुख कारण
वैश्विक तेल कीमतों में तेज़ गिरावट, जहाँ ब्रेंट ने 4.62% घटकर $83.88 प्रति बैरल तक पहुंचा, ने महंगाई की चिंताओं को कम किया और कंपनियों की आय की संभावनाओं को सुदृढ़ किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने जुलाई में शुद्ध खरीदार बनकर 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना।
सेक्टर और स्टॉक की प्रमुख चाल
सूचना प्रौद्योगिकी ने 2.53% की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की, इसके बाद सेवाएँ, औद्योगिक और वस्तु क्षेत्रों ने भी उछाल दिखाया। इंटरग्लोब एवीएशन, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, आईटीसी और एक्सिस बैंक ने मजबूत लाभ दिखाया, जबकि सन फार्मा, भारती एरटेल, मारुति और टाटा स्टील धीमे रहे।
नए क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियम
बाजार ने सोमवार से लागू नए क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन (CAS) के तहत ट्रेड किया, जहाँ 20‑मिनट की ऑक्शन विंडो में सभी लिक्विडिटी एकत्रित होती है। विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के देर‑सत्र में 24,589 से 24,774 तक की तेज़ उछाल इस मैकेनिज़्म के कारण हुआ, न कि सामान्य intraday ट्रेंड के कारण।
"तेल कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की पुनः प्रविष्टि ने भारतीय इक्विटीज़ के लिए एक दुर्लभ बुलिश कारक तैयार किया है," विनोद नायर, हेड ऑफ रिसर्च, जियोजिट इन्वेस्टमेंट्स ने कहा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that sustained foreign inflows combined with commodity price relief could extend the rally into the next fiscal quarter, reinforcing India’s appeal as a growth‑oriented market.
Frequently Asked Questions
- क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन क्या है? यह 20‑मिनट की ऑक्शन है जो शेयरों की आधिकारिक क्लोज़िंग कीमत निर्धारित करती है, जिससे बेहतर प्राइस डिस्कवरी और कम वोलैटिलिटी हासिल होती है।
- क्या कम तेल कीमतें बाजार को बुलिश बनाए रखेंगी? जबकि वे अल्पकालिक गति प्रदान करती हैं, अंततः व्यापक मैक्रो‑इकोनॉमिक कारक रुझान को तय करेंगे।