संगरूर के एक दंपति ने अपनी बेटी को खोने के दुख और आर्थिक तंगी के बाद हार नहीं मानी। मात्र ₹10,000 की जमा पूंजी से शुरू किया पोल्ट्री फार्म, जो आज हजारों पक्षियों और 500 किसानों के नेटवर्क में बदल चुका है।

मुख्य बातें

  • एक व्यक्तिगत त्रासदी और आर्थिक संकट के बाद दंपति ने शून्य से शुरुआत की।
  • मात्र ₹10,000 से 100 चूजों के साथ पोल्ट्री व्यवसाय शुरू किया।
  • आज उनका फार्म 5,000 से 10,000 पक्षियों का है और 500 किसानों को सहायता प्रदान करता है।
  • वे केवल पक्षी ही नहीं, बल्कि जैविक अंडे और चिकन अचार भी बेचते हैं।

पंजाब के संगरूर से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहाँ सरबजीत कौर और उनके पति संदीप सिंह ने जीवन के सबसे कठिन दौर को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। छह साल पहले, एक व्यक्तिगत त्रासदी ने इस दंपति को पूरी तरह तोड़ दिया था। उनकी दो महीने की बेटी की बीमारी के इलाज के लिए उन्हें अपनी आजीविका का मुख्य साधन—अपनी तीन भैंसें—बेचनी पड़ीं, लेकिन वे अपनी बच्ची को नहीं बचा सके।

इस भावनात्मक और आर्थिक झटके के बाद, उनके पास केवल ₹10,000 बचे थे। सरबजीत, जो राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर हैं और पहले एक शिक्षिका थीं, ने हार मानने के बजाय इस छोटी सी राशि से कुछ नया करने का फैसला किया। उन्होंने ₹10,000 से 100 देसी चूजे खरीदे और अपने घर पर ही एक छोटा पोल्ट्री यूनिट शुरू किया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कहानी?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कहानी केवल एक व्यवसाय की सफलता नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण उद्यमिता और संकट प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जहाँ अधिकांश लोग आपदा के बाद टूट जाते हैं, वहीं इस दंपति ने कौशल विकास (KVK प्रशिक्षण) और कड़ी मेहनत के दम पर एक आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है।

"संकट के समय में लिया गया एक छोटा सा साहसी निर्णय भविष्य के एक बड़े साम्राज्य की नींव रख सकता है।"

आज, उनका 'ग्रेवाल देसी पोल्ट्री फार्म' पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे कई राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहा है। वे हर महीने 15,000 से 21,000 पक्षियों की आपूर्ति करते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने 500 से अधिक किसानों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, जिन्हें वे न केवल चूजे और पक्षी प्रदान करते हैं, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन और 'बाय-बैक' (वापस खरीदने) की सुविधा भी देते हैं ताकि किसानों का जोखिम कम हो सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पारंपरिक रूप से, पंजाब के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन और डेयरी मुख्य आजीविका रहे हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन और चारे की बढ़ती लागत के कारण, अब पोल्ट्री और जैविक खेती जैसे विकल्प तेजी से उभर रहे हैं, जैसा कि इस दंपति ने सफलतापूर्वक सिद्ध किया है।

क्या आप जानते हैं?: देसी पोल्ट्री की मांग शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है क्योंकि लोग अब रासायनिक मुक्त और जैविक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. यह व्यवसाय कितने निवेश से शुरू किया जा सकता है?
संदीप के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार ₹5,000 से भी छोटे स्तर पर शुरुआत कर सकता है।

2. वे किसानों की मदद कैसे करते हैं?
वे किसानों को चूजे, आहार प्रबंधन, बीमारी से बचाव की ट्रेनिंग और उनके उत्पाद वापस खरीदने की गारंटी भी देते हैं।