कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) और गुडवर्क्स ग्रुप ने राज्य में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता किया है। इस पहल से अगले पांच वर्षों में ₹5,000 करोड़ का निवेश और 62,500 से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

  • KDEM और गुडवर्क्स ग्रुप के बीच समझौता हुआ।
  • ₹5,000 करोड़ के नए निवेश का लक्ष्य।
  • 50 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की स्थापना।
  • 62,500 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन।

बेंगलुरु: कर्नाटक की तकनीकी प्रगति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) और टेक इकोसिस्टम इनेबलर गुडवर्क्स ग्रुप (Goodworks Group) ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य कर्नाटक को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए दुनिया के सबसे पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, दोनों संगठन अगले पांच वर्षों में 50 नए GCCs स्थापित करने और मौजूदा केंद्रों के विस्तार के माध्यम से ₹5,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रख रहे हैं। यह निवेश न केवल राज्य के आईटी और बीटी क्षेत्र को मजबूत करेगा, बल्कि कर्नाटक की अर्थव्यवस्था में वार्षिक वेतन के रूप में लगभग ₹2,250 करोड़ का प्रवाह भी सुनिश्चित करेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह समझौता कर्नाटक के तकनीकी बुनियादी ढांचे और वैश्विक कंपनियों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा। यह पहल न केवल उच्च-कुशल पेशेवरों के लिए अवसर पैदा करेगी, बल्कि लगभग 1.25 मिलियन वर्ग फुट वाणिज्यिक रियल एस्टेट की मांग भी पैदा करेगी, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।

"कर्नाटक अपनी मजबूत प्रतिभा और प्रगतिशील नीतियों के कारण भारत के GCC इकोसिस्टम का नेतृत्व करना जारी रखे हुए है।" - संजीव गुप्ता, CEO, KDEM

गुडवर्क्स ग्रुप और Sansovi GCC मिलकर अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने के लिए उत्तर अमेरिका, यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख वैश्विक बाजारों में कर्नाटक का प्रचार करेंगे। इसके अलावा, गुडवर्क्स का AI-संचालित 'NetSkill Learning' प्लेटफॉर्म उद्योग के लिए तैयार कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेगा ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक, विशेष रूप से बेंगलुरु, लंबे समय से भारत का 'सिलिकॉन वैली' रहा है। पिछले दशक में, राज्य ने न केवल सॉफ्टवेयर सेवाओं बल्कि अब जटिल वैश्विक संचालन (GCCs) के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है, जो अनुसंधान और विकास (R&D) पर अधिक केंद्रित है।

क्या आप जानते हैं?: यह नया समझौता सीधे तौर पर 12,500 उच्च-कुशल प्रत्यक्ष नौकरियों और 50,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन करने की क्षमता रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कर्नाटक में ₹5,000 करोड़ का निवेश लाना और 50 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की स्थापना करना है।

2. इससे रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस पहल से कुल 62,500 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।