उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे राज्य बिजली सब्सिडी से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव राज्यों के खर्च को आवर्ती लागत से बदलकर एकमुश्त पूंजीगत व्यय में बदल देगा।

मुख्य बातें

  • राज्य बिजली सब्सिडी के कारण होने वाले राजस्व घाटे को कम करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं।
  • 'यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन मॉडल' (ULA) के माध्यम से राज्यों का खर्च आवर्ती सब्सिडी से बदलकर एकमुश्त पूंजीगत व्यय (CapEx) में बदल रहा है।
  • PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य मार्च 2027 तक 1 करोड़ घरों में सोलर पैनल लगाना है।
  • बिहार, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान जैसे राज्यों में सौर ऊर्जा अपनाने की रुचि बढ़ी है।

भारत के कई प्रमुख राज्य, जिनमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार शामिल हैं, बिजली सब्सिडी के कारण होने वाले भारी राजस्व घाटे को कम करने के लिए एक नई रणनीति अपना रहे हैं। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव, जे.वी.एन. सुब्रमण्यम के अनुसार, राज्य अब उन घरों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे हैं जो रूफटॉप सोलर पैनल लगाने में असमर्थ हैं।

वर्तमान में, कई राज्य अपने नागरिकों को मुफ्त बिजली प्रदान करते हैं, जिससे सरकारी खजाने पर निरंतर बोझ पड़ता रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए, राज्य अब यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन मॉडल (ULA) को अपना रहे हैं। इस मॉडल के तहत, राज्यों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी को अब बिजली बिलों में छूट के रूप में देने के बजाय, सोलर पैनल लगाने के लिए एकमुश्त पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव राज्यों के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने का एक स्मार्ट तरीका है। मुफ्त बिजली देने की आवर्ती लागत (Recurring Cost) के बजाय, सोलर पैनल लगाना एक स्थायी समाधान है जो भविष्य में बिजली की मांग और लागत दोनों को नियंत्रित करेगा।

राज्यों का सब्सिडी को पूंजीगत व्यय में बदलना ऊर्जा क्षेत्र में एक रणनीतिक बदलाव है जो वित्तीय घाटे को टिकाऊ बुनियादी ढांचे में बदल देता है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत, सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर (RTS) स्थापित करना है। इस योजना में लाभार्थियों को सब्सिडी के साथ-साथ आसान बैंक ऋण की सुविधा भी दी जा रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, अब तक 52 लाख घर इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत लंबे समय से बिजली सब्सिडी के कारण डिस्कॉम (वितरण कंपनियों) के वित्तीय संकट से जूझ रहा है। पारंपरिक रूप से, राज्यों को हर महीने बिजली बिलों पर भारी सब्सिडी देनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा की ओर यह बदलाव न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह राज्यों को अपने वित्तीय बोझ को कम करने का एक जरिया भी प्रदान करता है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में वर्तमान में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केरल जैसे पांच राज्य कुल स्थापित सौर क्षमता का 71% से अधिक हिस्सा रखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. PM सूर्य घर योजना का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका लक्ष्य मार्च 2027 तक 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है ताकि उन्हें मुफ्त बिजली मिल सके।

2. यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन मॉडल (ULA) क्या है?
यह एक मॉडल है जहाँ राज्य बिजली सब्सिडी के पैसे का उपयोग सीधे सोलर पैनल लगाने की लागत (CapEx) को कवर करने के लिए करते हैं।