प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वैश्विक बैंकिंग लीडर बनाने का लक्ष्य रखा है। इस विजन को साकार करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक हाई-लेवल बैंकिंग कमेटी के गठन का संकेत दिया है।
- प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य 2047 तक दुनिया के टॉप-5 बैंकों में एक भारतीय बैंक को शामिल करना है।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी के गठन की घोषणा की है।
- सरकार का उद्देश्य 'विकसित भारत 2047' के विजन के तहत भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को अब घरेलू प्रगति से आगे बढ़कर वैश्विक मंच पर अपनी धाक जमानी होगी। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जिस तरह भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है, अब समय आ गया है कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के शीर्ष 5 बैंकों की सूची में शामिल हो।
पीएम मोदी का यह विजन केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं है; उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि दुनिया की टॉप-5 फार्मा कंपनियों में भी एक भारतीय कंपनी होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह उपलब्धि केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि देश के उद्योग जगत और नागरिकों के सामूहिक सहयोग से ही संभव हो पाएगी।
बैंकिंग क्षेत्र का रणनीतिक बदलाव
भारत सरकार का बैंकिंग सेक्टर पर फोकस पिछले एक दशक से निरंतर रहा है। साल 2017 से पहले देश में 27 सरकारी बैंक थे, जिन्हें विलय (merger) की प्रक्रिया के माध्यम से घटाकर 12 कर दिया गया। इस एकीकरण का मुख्य उद्देश्य ऐसे बड़े और सक्षम बैंक तैयार करना था जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले भी संकेत दिया था कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसे 4-5 बड़े बैंकों के साथ-साथ एक पूर्णतः ग्लोबल स्तर के बैंक की आवश्यकता है।
BozokMedia analysis shows that this move is not just about prestige, but about financial sovereignty and global influence. By establishing a top-5 global bank, India can reduce its reliance on foreign financial intermediaries and provide better capital support to Indian multinationals expanding abroad. This structural shift is critical for maintaining a high GDP growth rate toward the 2047 target.
"The creation of a global Indian bank will act as a financial catalyst, enabling India to lead global trade settlements and financial architecture."
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 'PSB कॉन्फ्लुएंस 2026' के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि केंद्र सरकार जल्द ही बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन करेगी। वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को भविष्य की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप ढालना है।
वित्त मंत्री ने युवाओं को बैंकिंग भविष्य का मुख्य आधार बताया और कहा कि नई पीढ़ी को वित्तीय सेवाओं से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। यह कदम बजट 2026-27 में प्रस्तावित सुधारों की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
| विवरण | पूर्व स्थिति (2017 से पहले) | वर्तमान/लक्ष्य (2047 तक) |
|---|---|---|
| सरकारी बैंकों की संख्या | 27 बैंक | 12 बैंक (एकीकृत) |
| वैश्विक रैंकिंग लक्ष्य | घरेलू प्रभुत्व | टॉप-5 ग्लोबल बैंक |
| रणनीति | विस्तार (Expansion) | समेकन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा (Consolidation) |
Frequently Asked Questions
1. हाई-लेवल बैंकिंग कमेटी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस कमेटी का उद्देश्य बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की समीक्षा करना और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों के अनुरूप सुधारों की सिफारिश करना है।
2. पीएम मोदी ने फार्मा सेक्टर के बारे में क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य यह होना चाहिए कि दुनिया की टॉप-5 फार्मा कंपनियों में कम से कम एक भारतीय कंपनी शामिल हो।