चेन्नई पोर्ट अपने आउटर हार्बर प्रोजेक्ट को ₹17,700 करोड़ की लागत से पुनर्जीवित करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य बड़े जहाजों की क्षमता बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है।
- प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹17,700 करोड़ है।
- पहले चरण के पूरा होने पर 18 मीटर ड्राफ्ट वाले बड़े जहाज बंदरगाह पर आ सकेंगे।
- परियोजना को EPC और BOT मॉडल पर लागू किया जाएगा।
- दो बड़ी कंपनियों ने पहले ही इसमें रुचि दिखाई है।
चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी ने अपने महत्वाकांक्षी आउटर हार्बर प्रोजेक्ट को फिर से जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। लगभग ₹17,700 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का प्रस्ताव जल्द ही पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यह प्रोजेक्ट चेन्नई बंदरगाह की क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को बोर्ड द्वारा पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद, इसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। इस बीच, पोर्ट अथॉरिटी पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। उल्लेखनीय है कि दो प्रमुख फर्मों ने इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए अपनी प्रारंभिक रुचि व्यक्त की है।
परियोजना का स्वरूप और मॉडल
यह परियोजना EPC (इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण) और BOT (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल के संयोजन पर आधारित होगी। योजना के अनुसार, चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी, जबकि शेष राशि निजी ऑपरेटर द्वारा प्रबंधित की जाएगी। जो कंपनी इस प्रोजेक्ट का कॉन्सेशनaire बनेगी, उसे 45 वर्षों की परिचालन अवधि मिलेगी।
परियोजना के मुख्य कार्यों में ब्रेकवाटर का निर्माण, भूमि सुधार (reclamation), बर्थ निर्माण, ड्रेजिंग, कंटेनर पार्किंग यार्ड का विकास और आंतरिक रेल कनेक्टिविटी शामिल है। सामान्य बुनियादी ढांचे जैसे ब्रेकवाटर और ड्रेजिंग का काम सीधे पोर्ट अथॉरिटी द्वारा किया जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना भारत के पूर्वी तट पर समुद्री व्यापार की गतिशीलता को बदल सकती है। वर्तमान में, 24,000 TEU क्षमता वाले अल्ट्रा-लार्ज कंटेनर जहाज वैश्विक व्यापार का नेतृत्व कर रहे हैं। 18 मीटर के ड्राफ्ट की सुविधा मिलने से ये विशाल जहाज सीधे चेन्नई पोर्ट पर रुक सकेंगे, जिससे लॉजिस्टिक्स समय और लागत में भारी कमी आएगी।
यह परियोजना चेन्नई को पूर्वी तट पर फीडर ट्रैफिक को कैप्चर करने के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
परियोजना का पहला चरण अगले पांच वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है। एक बार जब ड्राफ्ट 18 मीटर तक पहुंच जाएगा, तो यह न केवल बड़े जहाजों को आकर्षित करेगा, बल्कि ऊपरी पूर्वी तट से आने वाले माल की आवाजाही को भी सुगम बनाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
चेन्नई पोर्ट के लिए यह तीसरा प्रयास है। लगभग दो दशक पहले इस योजना की रूपरेखा तैयार की गई थी, लेकिन पहले दो प्रयासों में यह सफल नहीं हो सकी। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद, अब आधुनिक तकनीक और बेहतर वित्तीय मॉडल के साथ इसे फिर से शुरू किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
1. इस परियोजना की कुल लागत कितनी है?
इस आउटर हार्बर प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹17,700 करोड़ है।
2. यह प्रोजेक्ट कितने वर्षों में पूरा होगा?
परियोजना का पहला चरण अगले पांच वर्षों में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।