कृषि मंत्री के. अच्चनईडू ने विधानसभा में घोषणा की है कि राज्य में अक्टूबर 2026 तक के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार उपलब्ध है। नई ऐप-आधारित वितरण प्रणाली से किसानों को खाद प्राप्त करने में आसानी हो रही है।

  • राज्य में 9.26 लाख टन उर्वरक का कुल स्टॉक मौजूद है।
  • APAIMS 2.0 ऐप-आधारित प्रणाली से खाद के दुरुपयोग और लंबी लाइनों में कमी आई है।
  • अन्नदाता सुखीभावा-पीएम किसान योजना के तहत ₹14,664 करोड़ किसानों के खातों में भेजे गए।

आंध्र प्रदेश के कृषि मंत्री के. अच्चनईडू ने विधानसभा में राज्य की कृषि स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के पास अक्टूबर 2026 तक की अनुमानित आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार है। वर्तमान में, राज्य में कुल 9.26 लाख टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें 3.69 लाख टन यूरिया और 89,000 टन डीएपी (DAP) शामिल है।

डिजिटल क्रांति: APAIMS 2.0 का प्रभाव

मंत्री ने बताया कि नई APAIMS 2.0 ऐप-आधारित वितरण प्रणाली ने आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से सुव्यवस्थित कर दिया है। यह प्रणाली वैज्ञानिक तरीके से खेती की जरूरतों का निर्धारण करती है, जिसमें किसान, सर्वे नंबर, खेती का क्षेत्र और फसल के प्रकार जैसे कारकों का विश्लेषण किया जाता है। इससे उर्वरकों के अवैध डायवर्जन, अत्यधिक खपत और वितरण केंद्रों पर लगने वाली लंबी लाइनों की समस्या काफी हद तक कम हो गई है।

अब तक, लगभग 15.69 लाख किसानों ने इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से 3.70 लाख टन यूरिया और 1.10 लाख टन डीएपी प्राप्त किया है। शुरुआत में किराये के किसानों और वेबलैंड (Webland) से बाहर के किसानों को कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था, लेकिन सरकार ने रैयथ सेवा केंद्रों (RSK) पर सहायता डेस्क और कॉल सेंटर स्थापित करके इन समस्याओं का समाधान किया है।

अन्नदाता सुखीभावा योजना और वित्तीय सहायता

विधानसभा में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए, अच्चनईडू ने खुलासा किया कि मई 2024 से अब तक अन्नदाता सुखीभावा-पीएम किसान योजना के तहत कुल ₹14,664.33 करोड़ सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा किए जा चुके हैं। इस भारी-भरकम राशि में राज्य सरकार का योगदान ₹8,903 करोड़ और केंद्र सरकार का हिस्सा ₹5,761 करोड़ है।

डिजिटल वितरण प्रणाली ने न केवल पारदर्शिता बढ़ाई है, बल्कि बिचौलियों के प्रभाव को भी समाप्त कर दिया है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से धन का यह प्रवाह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है। हालांकि, कुछ किसानों को आधार मैपिंग या निष्क्रिय बैंक खातों के कारण भुगतान में समस्या आई, जिसे सुधारने के लिए फील्ड स्टाफ और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से निरंतर निगरानी की जा रही है।

वितरण और स्टॉक का विवरण

उर्वरक का प्रकारउपलब्ध स्टॉक (टन में)
यूरिया (Urea)3,69,000
डीएपी (DAP)89,000
कुल उर्वरक भंडार9,26,000
Did You Know?: आंध्र प्रदेश सरकार ने किसानों की मदद के लिए कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) को प्री-बुकिंग की सुविधा दी है, जिसके लिए केंद्र सरकार ₹15 प्रति लेनदेन का सहयोग देती है।

Frequently Asked Questions

1. आंध्र प्रदेश में उर्वरक की उपलब्धता कब तक सुनिश्चित है?
मंत्री के अनुसार, वर्तमान स्टॉक अक्टूबर 2026 तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

2. APAIMS 2.0 प्रणाली कैसे काम करती है?
यह ऐप किसान के सर्वे नंबर, फसल और भूमि क्षेत्र के आधार पर वैज्ञानिक रूप से खाद की मात्रा निर्धारित करती है।