देश में बढ़ती चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि सरकार ने चीनी के बजाय इथेनॉल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
- सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शून्य-शुल्क आयात को मंजूरी दी है।
- यह कदम 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
- ISMA ने कीमतों में वृद्धि को सट्टेबाजी और पैनिक बाइंग का परिणाम बताया है।
- अरविंद केजरीवाल ने गन्ने के उपयोग को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
भारत में बढ़ती चीनी की कीमतों और आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए, केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात पर शून्य शुल्क (Zero Duty) लगाने की अनुमति दे दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित करना और कीमतों में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि को रोकना है।
बाजार की स्थिति और कीमतों में उछाल
पिछले कुछ हफ्तों में घरेलू बाजारों में चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जहाँ पहले चीनी की कीमतें 45 से 50 रुपये प्रति किलो के आसपास थीं, वहीं अब कई क्षेत्रों में यह बढ़कर 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई हैं। त्योहारों के सीजन से ठीक पहले कीमतों में यह उछाल आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
उद्योग जगत का पक्ष: कमी नहीं, सट्टेबाजी है कारण
चीनी उद्योग से जुड़ी प्रमुख संस्था, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने बाजार में चीनी की कमी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ISMA के अनुसार, देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और कीमतों में वृद्धि का कारण वास्तविक कमी नहीं, बल्कि त्योहारों से पहले की जाने वाली 'सट्टेबाजी' और 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में की गई खरीदारी) है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आयात की यह अनुमति बाजार में सट्टेबाजों को डराने और कीमतों को स्थिर करने के लिए एक मनोवैज्ञानिक उपकरण के रूप में कार्य करेगी।
ISMA ने यह भी स्पष्ट किया कि नए चीनी सीजन में गन्ने की पेराई प्रक्रिया सामान्य समय से 10-15 दिन पहले शुरू होने की उम्मीद है, जिससे बाजार में नई आपूर्ति जल्द उपलब्ध होगी। सरकार का यह निर्णय एक 'एहतियाती उपाय' है ताकि मांग के चरम समय में आपूर्ति की निरंतरता बनी रहे।
राजनीतिक घमासान: केजरीवाल का तीखा हमला
इस आर्थिक मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। केजरीवाल ने तर्क दिया कि देश में चीनी की कमी इसलिए हो रही है क्योंकि सरकार ने चीनी बनाने वाले गन्ने का रुख इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ दिया है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया, "चीनी बनाने वाले गन्ने से मोदी जी ने इथेनॉल बना डाला है। लगभग तीस लाख टन चीनी के गन्ने से इथेनॉल बनाया गया है। प्रधानमंत्री का दावा है कि इससे विदेशी मुद्रा बच रही है, लेकिन अब उसी विदेशी मुद्रा का उपयोग चीनी आयात करने के लिए किया जा रहा है।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा (इथेनॉल ब्लेंडिंग) बनाम खाद्य सुरक्षा (चीनी की उपलब्धता) के बीच के संघर्ष को भी दर्शाता है। सरकार का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ईंधन आयात कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका सीधा असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
Frequently Asked Questions
1. सरकार ने चीनी आयात पर शुल्क क्यों हटाया है?
त्योहारों के सीजन में चीनी की कीमतों को स्थिर रखने और बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुल्क हटाया गया है।
2. क्या वास्तव में देश में चीनी की कमी है?
चीनी उद्योग (ISMA) के अनुसार देश में पर्याप्त स्टॉक है, कीमतों में वृद्धि केवल सट्टेबाजी के कारण है।