अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले और कमजोर होते डॉलर के कारण भारतीय रुपया गुरुवार को 17 पैसे बढ़कर 95.56 पर पहुंच गया। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये की राह में बाधा बनी हुई हैं।
- रुपया 17 पैसे बढ़कर 95.56 प्रति अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।
- अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन को दोगुना करने से डॉलर कमजोर हुआ।
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि रुपये के लिए दबाव का कारण बनी हुई है।
- Sensex और Nifty में भी शुरुआती कारोबार में तेजी देखी गई।
मुंबई: भारतीय मुद्रा यानी रुपये ने गुरुवार (20 अगस्त, 2026) को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे की महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज की। रुपया 95.56 के स्तर पर पहुंच गया, जो अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के कारण संभव हुआ है।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा फैसला और डॉलर पर असर
विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड के लिए अपने बायबैक ऑपरेशंस (खरीद वापस करने की प्रक्रिया) को दोगुना करने की घोषणा है। अमेरिकी ट्रेजरी ने घोषणा की है कि वह 9 सितंबर से प्रति ऑपरेशन $2 बिलियन से बढ़ाकर $4 बिलियन तक की खरीदारी करेगी। इस कदम से अमेरिकी लंबी अवधि की यील्ड (yield) में गिरावट आई है, जिससे डॉलर की आकर्षण क्षमता कम हो गई है और डॉलर इंडेक्स 98.82 के निचले स्तर पर आ गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम का वैश्विक तरलता (liquidity) और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कम होती है, तो निवेशक अन्य उच्च प्रतिफल वाली मुद्राओं की ओर रुख करते हैं, जिससे रुपये जैसी मुद्राओं को मजबूती मिलती है। हालांकि, यह मजबूती पूरी तरह से स्थायी नहीं है क्योंकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।
कम लंबी अवधि की यील्ड और राजकोषीय सहायता की चिंताएं डॉलर की संपत्तियों के आकर्षण को कम कर सकती हैं। - अमित पबारी, MD, CR Forex Advisors
कच्चे तेल की चुनौतियां और बाजार की स्थिति
रुपये की इस बढ़त के बावजूद, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल एक चिंता का विषय बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड $91.91 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो भारत के आयात बिल को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तेल की कीमतें $90 के ऊपर बनी रहेंगी, रुपये की मजबूती सीमित रहेगी।
घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक रुख देखा गया। Sensex 504 अंक बढ़कर 77,416.16 पर और Nifty 118 अंक चढ़कर 24,198.55 पर कारोबार कर रहा था।
Historical Background
ऐतिहासिक रूप से, भारतीय रुपया अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों और वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने रुपये की विनिमय दर को काफी प्रभावित किया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: रुपये में आज वृद्धि क्यों हुई?
उत्तर: अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक बढ़ाने की घोषणा और कमजोर होते अमेरिकी डॉलर के कारण रुपये में वृद्धि हुई।
प्रश्न 2: क्या तेल की कीमतें रुपये को प्रभावित करती हैं?
उत्तर: हाँ, भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये पर दबाव डालती हैं।