महाराष्ट्र सरकार निर्माणाधीन संपत्तियों के खरीदारों को राहत देने के लिए स्टांप ड्यूटी भुगतान के नियमों में बदलाव करने की योजना बना रही है। इस नए प्रस्ताव के तहत खरीदारों को समझौते के समय केवल 75% स्टांप शुल्क देना होगा।

  • खरीदार अब 'एग्रीमेंट टू सेल' के समय केवल 75% से 80% स्टांप ड्यूटी चुका सकेंगे।
  • शेष राशि का भुगतान संपत्ति के अंतिम पंजीकरण (Sale Deed) के समय करना होगा।
  • सरकार पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन करने पर विचार कर रही है।
  • नागपुर में बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट वाली इमारतों पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

महाराष्ट्र सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और घर खरीदारों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार की योजना पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन करने की है, ताकि निर्माणाधीन संपत्तियों (under-construction properties) के खरीदारों को स्टांप ड्यूटी के भुगतान में बड़ी राहत मिल सके।

वर्तमान नियमों के अनुसार, जब कोई खरीदार निर्माणाधीन संपत्ति के लिए 'एग्रीमेंट टू सेल' (बिक्री का समझौता) करता है, तो उसे पूरी स्टांप ड्यूटी का भुगतान एक बार में ही करना पड़ता है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि बिल्डर बाद में नियमों का उल्लंघन करता है या योजना के अनुसार निर्माण नहीं करता है, तो खरीदार को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि वह पहले ही पूरी राशि चुका चुका होता है।

क्यों है यह कदम महत्वपूर्ण?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम न केवल खरीदारों के जोखिम को कम करेगा, बल्कि रियल एस्टेट बाजार में विश्वास भी बढ़ाएगा। यदि बिल्डर निर्माण में धोखाधड़ी करता है या अवैध निर्माण करता है, तो खरीदार का पैसा सुरक्षित रहेगा क्योंकि उसने अभी तक पूरी स्टांप ड्यूटी नहीं चुकाई होगी।

राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम कानून में संशोधन पर विचार कर रहे हैं ताकि खरीदार केवल 75% या 80% स्टांप ड्यूटी का भुगतान समझौते के समय करें, और शेष राशि सेल डीड के समय दी जाए।"

इस बीच, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि नागपुर शहर और जिले में लगभग 3,940 ऐसी इमारतें हैं जिनके पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) नहीं है। इन बिल्डरों को नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माण के लिए तीन महीने का समय दिया गया है, जिसके बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और राजस्व प्रभाव

महाराष्ट्र का पंजीकरण और स्टांप विभाग राज्य के खजाने में जीएसटी के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। वित्त वर्ष 2025-26 में, इस विभाग ने ₹61,816.81 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया है। सरकार अब इस प्रक्रिया को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए निजी भागीदारी के माध्यम से मॉडल सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने की दिशा में भी काम कर रही है।

Did You Know?: महाराष्ट्र में स्टांप शुल्क का संग्रह राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो बुनियादी ढांचे के विकास के लिए महत्वपूर्ण राजस्व प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

1. नया नियम क्या है?
खरीदार अब एग्रीमेंट के समय केवल 75-80% स्टांप ड्यूटी देंगे, बाकी सेल डीड के समय।

2. यह खरीदारों को कैसे लाभ पहुँचाएगा?
यदि बिल्डर निर्माण में धोखाधड़ी करता है, तो खरीदार का स्टांप शुल्क का एक हिस्सा बचा रहेगा।