सेबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में सक्रिय अधिकांश रिटेल ट्रेडर्स की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम है और उनमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। बाजार में उतार-चढ़ाव और सख्त नियमों के बीच, रिटेल निवेशकों के लिए घाटे का आंकड़ा चिंताजनक बना हुआ है।

  • F&O ट्रेडिंग में शामिल 73% रिटेल ट्रेडर्स की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम है।
  • युवाओं (30 वर्ष से कम) की भागीदारी में 26% की गिरावट आई है, लेकिन वे कुल ट्रेडर्स का 43% हैं।
  • रिटेल ट्रेडर्स के कुल घाटे में कमी आई है, लेकिन 88% ट्रेडर्स अभी भी नुकसान में हैं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की नवीनतम रिपोर्ट 'इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में व्यक्तिगत ट्रेडर्स की लाभप्रदता (FY25-FY26)' ने बाजार के एक गंभीर पहलू को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में भाग लेने वाले अधिकांश रिटेल ट्रेडर्स कम आय वर्ग से आते हैं। 2025-26 में, 73% रिटेल ट्रेडर्स की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम थी, जो दर्शाता है कि डेरिवेटिव बाजार में जोखिम लेने वाले अधिकांश लोग आर्थिक रूप से संवेदनशील हैं।

बाजार नियामक द्वारा सट्टेबाजी को कम करने के लिए कड़े नियम लागू करने के बाद, रिटेल ट्रेडर्स की कुल संख्या में 20% की गिरावट देखी गई है, जो 98.1 लाख से घटकर 78.6 लाख रह गई है। हालांकि, यह गिरावट राहत की बात नहीं है क्योंकि 88% व्यक्तिगत ट्रेडर्स अभी भी घाटे में कारोबार कर रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि F&O सेगमेंट में रिटेल भागीदारी का कम आय वाले वर्ग में केंद्रित होना वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ा जोखिम है। जब कम आय वाले लोग उच्च जोखिम वाले डेरिवेटिव्स में पैसा लगाते हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत वित्तीय संकट का कारण बनता है, बल्कि व्यापक बाजार अस्थिरता को भी जन्म दे सकता है।

डेरिवेटिव्स में उच्च जोखिम और कम आय वाले निवेशकों का संयोजन एक 'वित्तीय टाइम बम' की तरह है जो बाजार की गिरावट के समय गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

युवाओं के बीच ट्रेडिंग का चलन भी कम हो रहा है। 30 वर्ष से कम उम्र के ट्रेडर्स की संख्या में 26% की गिरावट आई है, जो अब 32.83 लाख है। इसके बावजूद, GenZ (30 से कम उम्र) कुल रिटेल ट्रेडर्स का 43% हिस्सा बनाती है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इन युवा ट्रेडर्स में से 89% (लगभग 29.07 लाख) को भारी नुकसान हुआ है।

लैंगिक दृष्टिकोण से देखें तो महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि हुई है। 2025-26 में, रिटेल ट्रेडर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 17.1% रही। हालांकि, महिलाओं के लिए भी घाटे का प्रतिशत काफी अधिक है, जहाँ 85% महिला ट्रेडर्स ने नुकसान उठाया।

दूसरी ओर, बड़े खिलाड़ी जैसे 'प्रोपराइटरी ट्रेडिंग फर्म्स' (Prop Firms) भारी मुनाफा कमा रहे हैं। इन फर्मों ने 2025-26 में 44,483 करोड़ रुपये का सकल लाभ कमाया। ये फर्में उन्नत एल्गोरिदम, हाई-स्पीड इंटरनेट और विशाल पूंजी का उपयोग करके बाजार से लाभ खींचती हैं, जो छोटे रिटेल ट्रेडर्स के विपरीत है।

Did You Know?: F&O ट्रेडिंग में होने वाले नुकसान का एक बड़ा हिस्सा संस्थागत निवेशकों के बजाय व्यक्तिगत छोटे निवेशकों की जेब से जाता है।

Frequently Asked Questions

1. F&O ट्रेडिंग क्या है?
यह एक प्रकार का डेरिवेटिव अनुबंध है जहाँ दो पक्ष भविष्य की एक निश्चित तारीख पर एक पूर्व निर्धारित कीमत पर संपत्ति खरीदने या बेचने के लिए सहमत होते हैं।

2. क्या SEBI के नियमों से ट्रेडिंग कम हुई है?
रिपोर्ट के अनुसार, SEBI के कड़े नियमों और STT में वृद्धि के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम और रिटेल भागीदारी में गिरावट आई है।