मॉरीशस की वित्तीय सेवा मंत्री ज्योति जीतून ने कहा है कि भारत की मजबूत आर्थिक नींव वैश्विक निवेशकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। संशोधित DTAA संधि से अब भारत में केवल वास्तविक और निर्माणकारी निवेश ही सुनिश्चित होगा।

  • मॉरीशस ने अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में $186 बिलियन का FDI प्रवाह किया है।
  • संशोधित दोहरे कराधान बचाव समझौते (DTAA) से निवेश में पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • भारत का लक्ष्य 2028-2029 तक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना है।
  • 'प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट' (PPT) के माध्यम से टैक्स चोरी के रास्तों को बंद किया गया है।

मॉरीशस की वित्तीय सेवा और आर्थिक योजना मंत्री, ज्योति जीतून ने हाल ही में एक साक्षात्कार में भारत की आर्थिक मजबूती की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत की विशाल बाजार क्षमता और निरंतर हो रहे सुधारों ने वैश्विक निवेशकों के बीच जबरदस्त विश्वास पैदा किया है। भारत वर्तमान में दुनिया की शीर्ष चार आर्थिक शक्तियों में से एक है और उसका लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2028-2029 तक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना है।

ऐतिहासिक रूप से, मॉरीशस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का एक प्रमुख स्रोत रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 की अवधि के दौरान, मॉरीशस ने भारत में कुल $186 बिलियन का निवेश किया, जो उस अवधि के दौरान भारत में आने वाले कुल FDI का लगभग एक चौथाई है। वर्ष 2025-26 में भी मॉरीशस ने $6.6 बिलियन का निवेश किया, जो सिंगापुर के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत था।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत और मॉरीशस के बीच निवेश का यह प्रवाह केवल पूंजी का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक संबंधों का प्रतीक है। संशोधित दोहरे कराधान बचाव समझौते (DTAA) का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह 'शेल कंपनियों' के माध्यम से होने वाली टैक्स चोरी को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारत की आर्थिक नींव और डिजिटल परिवर्तन वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने के लिए सबसे मजबूत इंजन हैं।

निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के लिए, दोनों देशों ने 'प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट' (PPT) को लागू किया है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि यदि किसी कंपनी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य केवल कर लाभ प्राप्त करना है, तो भारत उन कर लाभों को देने से इनकार कर सकता है। मॉरीशस सरकार ने हाल ही में इस संशोधन की पुष्टि की है, जिससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता समाप्त होगी।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत और मॉरीशस के बीच कर संधि 1982 में हस्ताक्षरित की गई थी। 2016 में एक महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल के माध्यम से भारत को पूंजीगत लाभ कर लगाने की अनुमति दी गई थी, जिसके बाद निवेश के पैटर्न में बदलाव आया। अब, 2024 के संशोधनों के साथ, दोनों राष्ट्र एक अधिक पारदर्शी और विनियमित निवेश वातावरण की ओर बढ़ रहे हैं।

Did You Know?: मॉरीशस ने पिछले दो दशकों में भारत में निवेश करने के लिए एक रणनीतिक द्वार के रूप में कार्य किया है, जो कुल FDI का लगभग 25% हिस्सा कवर करता है।

Frequently Asked Questions

1. संशोधित DTAA का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कर चोरी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक आर्थिक गतिविधियों वाली कंपनियां ही कर लाभ प्राप्त करें।

2. भारत की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2028-2029 तक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना है।