भारत का पावर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण एक क्रांतिकारी मोड़ पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी विनिर्माण और ऊर्जा भंडारण समाधान इस विकास के मुख्य स्तंभ होंगे।

  • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में ईवी और औद्योगिक स्वचालन के कारण तीव्र वृद्धि हो रही है।
  • भारत सौर ऊर्जा में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, लेकिन ग्रिड सुरक्षा के लिए बेहतर स्टोरेज की आवश्यकता है।
  • रक्षा क्षेत्र में ड्रोन और स्वायत्त वाहनों (UAVs) की बढ़ती मांग ने बैटरी तकनीक को महत्वपूर्ण बना दिया है।
  • स्वदेशी विनिर्माण और स्थानीय बुनियादी ढांचे का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

कोयंबटूर में आयोजित 'इलेक्ट्रोटेक 2026' प्रदर्शनी के दौरान विशेषज्ञों ने भारत के ऊर्जा परिदृश्य में हो रहे बड़े बदलावों पर प्रकाश डाला। हाई एनर्जी बैटरीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जी.ए. पाथंजलि ने कहा कि पावर इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के सबसे तेजी से बढ़ते और विघटनकारी क्षेत्रों में से एक बन गया है। यह विकास मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), नवीकरणीय ऊर्जा मानकों और औद्योगिक स्वचालन द्वारा संचालित है।

पाथंजलि ने जोर देकर कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल एक स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करेगा, बल्कि आर्थिक रूप से भी टिकाऊ होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि ईवी अपनाने की प्रक्रिया को सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से और अधिक गति दी जानी चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का पावर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र केवल एक औद्योगिक विकास नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा संप्रभुता का आधार है। जैसे-जैसे हम जीवाश्म ईंधन से हटकर नवीकरणीय स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की भूमिका बिजली के कुशल प्रबंधन और वितरण में महत्वपूर्ण हो जाती है।

रोबोटिक्स अब केवल एक औद्योगिक अपग्रेड नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में, भारत की स्थिति अत्यंत मजबूत है। भारत सौर ऊर्जा में दुनिया में तीसरे और पवन ऊर्जा में चौथे स्थान पर है। हालांकि, ग्रिड सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण भारत को सौर उत्पादन में 2.3 टेरावाट घंटा का नुकसान उठाना पड़ा है। इस कमी को दूर करने के लिए उन्नत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems) की तत्काल आवश्यकता है।

इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में भी एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आधुनिक युद्ध कौशल अब लड़ाकू विमानों की बैटरी से हटकर मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) और 'स्वार्म ड्रोन' तकनीक की ओर स्थानांतरित हो रहा है। यह बदलाव रक्षा उपकरणों के लिए नई प्रकार की उच्च-क्षमता वाली बैटरी और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग पैदा कर रहा है।

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के महानिदेशक मोहम्मद रिहान ने कहा कि संस्थान उद्योग के साथ मिलकर उच्च ऊर्जा भंडारण बैटरी विकसित करने के तरीकों की तलाश करेगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में उद्योगों, संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

Did You Know?: भारत वर्तमान में सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: पावर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में विकास के मुख्य चालक क्या हैं?
उत्तर: इलेक्ट्रिक वाहन (EV), नवीकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक स्वचालन (Automation) और एआई-आधारित निदान इसके मुख्य चालक हैं।

प्रश्न 2: भारत को सौर ऊर्जा में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
उत्तर: ग्रिड सुरक्षा और कुशल ऊर्जा भंडारण (Storage) की कमी भारत के लिए प्रमुख चुनौतियां हैं।