पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भारत के वर्तमान आर्थिक मॉडल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि देश में प्रतिस्पर्धा कम हो रही है और विनिर्माण क्षेत्र स्थिर है। उन्होंने सरकार की आर्थिक विशेषज्ञता पर भी सवाल उठाए हैं।
- पी. चिदंबरम ने वर्तमान आर्थिक मॉडल को 'डिफ़ॉल्ट मॉडल' करार दिया।
- विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में हिस्सा 13.5% से 14% पर स्थिर बना हुआ है।
- सरकार में डॉ. मनमोहन सिंह के स्तर की आर्थिक विशेषज्ञता की कमी का दावा।
- 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी योजनाओं की विफलता का आरोप।
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 'बिजनेस टुडे' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, उन्होंने तर्क दिया कि भारत का वर्तमान आर्थिक मॉडल विकास और रोजगार सृजन के मोर्चे पर विफल रहा है। चिदंबरम के अनुसार, देश में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी गिर गया है, जिससे एकाधिकार (Monopolies) को बढ़ावा मिल रहा है।
चिदंबरम ने सरकार की नीतिगत क्षमता पर प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान प्रशासन में आर्थिक विशेषज्ञता का अभाव है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सरकार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो उनकी आर्थिक समझ और विशेषज्ञता की तुलना कर सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारत जैसे उभरते बाजार के लिए प्रतिस्पर्धा की कमी और विनिर्माण क्षेत्र में ठहराव दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। यदि विनिर्माण क्षेत्र जीडीपी में अपना योगदान नहीं बढ़ा पाता है, तो भारत का वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में स्थान बनाना कठिन होगा।
"वर्तमान आर्थिक मॉडल एक डिफ़ॉल्ट मॉडल है जो विकास और नौकरियों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।"
उन्होंने सरकार की प्रमुख पहलों, जैसे 'मेक इन इंडिया', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) की प्रभावशीलता पर भी संदेह व्यक्त किया। चिदंबरम ने कहा कि इन योजनाओं के बावजूद, विनिर्माण क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान लगभग 13.5 से 14 प्रतिशत पर ही अटका हुआ है, जो कि अपेक्षित वृद्धि से बहुत कम है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने वर्तमान नियामक वातावरण को 'नियम और विनियमन राज' (Rule and Regulation Raj) करार दिया। उन्होंने छोटे व्यापारिक भागीदारों के साथ किए गए विदेशी व्यापार समझौतों की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए, जो देश के व्यापक व्यापारिक हितों के अनुकूल नहीं दिखते हैं।
Historical Background
भारत में विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान पिछले कुछ दशकों में उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद, सेवा क्षेत्र में भारी उछाल आया, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र को वह गति नहीं मिल सकी जो एक बड़े श्रम बल को रोजगार देने के लिए आवश्यक थी।
Frequently Asked Questions
1. पी. चिदंबरम ने विनिर्माण क्षेत्र के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 13.5-14% पर स्थिर है और सरकारी योजनाएं इसे बढ़ाने में विफल रही हैं।
2. उन्होंने सरकार की विशेषज्ञता पर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में डॉ. मनमोहन सिंह के स्तर की आर्थिक विशेषज्ञता रखने वाला कोई नहीं है।