बेंगलुरु के ऐतिहासिक जॉनसन मार्केट के पुनर्विकास का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। सरकार ने बजट आवंटित किया है, लेकिन व्यापारियों और प्रशासन के बीच भविष्य की रूपरेखा को लेकर गहरा मतभेद बना हुआ है।

  • जॉनसन मार्केट के पुनर्विकास के लिए ₹20 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
  • व्यापारी तोड़फोड़ के बजाय मौजूदा ढांचे के नवीनीकरण की मांग कर रहे हैं।
  • प्रशासन जन-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत पूर्ण पुनर्विकास की योजना बना रहा है।
  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) का अभी भी इंतजार है।

बेंगलुरु का जॉनसन मार्केट, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, एक बार फिर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। दशकों से चल रहे पुनर्विकास के वादे अब भी केवल कागजों तक सीमित हैं। हालांकि इस वर्ष के बजट में सेंट्रल कॉर्पोरेशन ने बाजार के विकास के लिए ₹20 करोड़ आवंटित किए हैं, लेकिन अभी तक कोई विस्तृत ब्लूप्रिंट या विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सामने नहीं आई है।

व्यापारियों के बीच विभाजन

पुनर्विकास की इस योजना ने स्थानीय व्यापारियों को दो स्पष्ट गुटों में बांट दिया है। एक गुट चाहता है कि बाजार का आधुनिकीकरण हो, लेकिन वे चाहते हैं कि यह केवल मौजूदा लाइसेंस प्राप्त दुकानदारों को ध्यान में रखकर किया जाए। वहीं, दूसरा गुट पूरी तरह से तोड़फोड़ का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि ऐतिहासिक इमारत को गिराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसके बुनियादी ढांचे, जल निकासी और खुले स्थानों में सुधार किया जाना चाहिए।

मदीना स्टोर्स के महमूद जैसे व्यापारियों का कहना है कि सरकार बार-बार योजनाएं बनाती है, लेकिन स्पष्टता की कमी के कारण केवल तोड़फोड़ की बात ही सामने आती है। उनका मानना है कि मौजूदा ढांचे को अपग्रेड करना अधिक व्यावहारिक होगा ताकि व्यापारियों का व्यवसाय बाधित न हो।

पुनर्विकास की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी ही व्यापारियों के अविश्वास का सबसे बड़ा कारण है।

प्रशासनिक रुख और चुनौतियां

दूसरी ओर, शांतिनगर के विधायक एन.ए. हारिस ने स्पष्ट किया है कि बाजार की संरचना काफी जर्जर हो चुकी है। बढ़ते यातायात और जनसंख्या के दबाव को देखते हुए, सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत इसे पूरी तरह से नया रूप देने पर विचार कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि मेट्रो की 'पिंक लाइन' के आने से क्षेत्र में बदलाव अनिवार्य हो जाएगा और पार्किंग की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और जटिलताएं

यह पहली बार नहीं है जब जॉनसन मार्केट विवादों में है। 2015 में भी सिद्दरामैया सरकार के दौरान इसी तरह का PPP मॉडल प्रस्तावित किया गया था, जिसे बाजार संघ के विरोध और कानूनी लड़ाई के कारण बंद करना पड़ा था। वर्तमान में, बाजार यातायात की भीड़ और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल अनिश्चितता ही हाथ लगी है।

Did You Know?: जॉनसन मार्केट बेंगलुरु के सबसे पुराने और प्रमुख थोक बाजारों में से एक है, जो दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सरकार ने जॉनसन मार्केट के लिए कितना बजट रखा है?
उत्तर: सरकार ने इस साल के बजट में जॉनसन मार्केट सहित तीन बाजारों के विकास के लिए ₹20 करोड़ आवंटित किए हैं।

प्रश्न 2: व्यापारी पुनर्विकास का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: व्यापारी मुख्य रूप से तोड़फोड़ और विस्थापन के डर से विरोध कर रहे हैं; वे ढांचे के नवीनीकरण के पक्ष में हैं।