तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, कटाई के समय कपास की कीमतें ₹75-80 प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट वैश्विक बाजार और मानसून के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है।
- कटाई के समय कपास का अनुमानित मूल्य ₹75-80 प्रति किलोग्राम है।
- भारत वैश्विक स्तर पर कपास की खेती में पहले स्थान पर है।
- कीमतों में उतार-चढ़ाव मानसून और अन्य राज्यों की आवक पर निर्भर करेगा।
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), कोयंबटूर के डोमेस्टिक एंड एक्सपोर्ट मार्केट इंटेलिजेंस सेल (DEMIC) ने आगामी फसल सीजन के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की कीमत कटाई के समय लगभग ₹75-80 प्रति किलोग्राम रहने की संभावना है। यह पूर्वानुमान पिछले 20 वर्षों के मूलानूर रेगुलेटेड मार्केट के मूल्य विश्लेषण पर आधारित है।
क्षेत्रीय उत्पादन और विस्तार
तमिलनाडु में कपास की खेती का विस्तार किया गया है। वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कपास की खेती 1.02 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जिससे लगभग 3.80 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 350 किलोग्राम दर्ज की गई है। प्रमुख उत्पादक जिलों में तिरुवरुर, विरुधुनगर, मयिलादुथुराई, रामनाथपुरम, तिरुचि और सेलम शामिल हैं, जहां बीटी हाइब्रिड, वरलक्ष्मी और सुविन जैसी किस्मों की खेती की जाती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि कपास की कीमतों में यह संभावित वृद्धि किसानों की आय में सुधार कर सकती है, लेकिन यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और जलवायु कारकों के प्रति संवेदनशील है। चूंकि भारत दुनिया में कपास की खेती के मामले में पहले स्थान पर है, इसलिए घरेलू कीमतों में बदलाव का सीधा असर वैश्विक वस्त्र बाजार पर पड़ता है।
कपास की कीमतों का भविष्य दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति और अन्य प्रमुख राज्यों जैसे महाराष्ट्र और गुजरात से होने वाली आवक पर निर्भर करेगा।
वैश्विक परिदृश्य और ऐतिहासिक संदर्भ
वैश्विक स्तर पर कपास उत्पादन में चीन, भारत, ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 74% है। भारत उत्पादन और खपत के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। ऐतिहासिक रूप से, कपास की कीमतें एल नीनो (El Nino) जैसे जलवायु कारकों और अन्य उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से होने वाली आपूर्ति के आधार पर अत्यधिक अस्थिर रही हैं।
Frequently Asked Questions
1. TNAU ने कपास की कीमत का अनुमान कैसे लगाया?
TNAU ने पिछले 20 वर्षों के मूलानूर रेगुलेटेड मार्केट के आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करके यह पूर्वानुमान लगाया है।
2. कपास की कीमतों को कौन से कारक प्रभावित कर सकते हैं?
मानसून का प्रदर्शन, एल नीनो का प्रभाव और अन्य राज्यों से होने वाली फसल की आवक मुख्य कारक हैं।