जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि अपेक्षित 2.5 लाख मामलों के मुकाबले केवल 74,758 मामले ही दर्ज किए गए हैं। उन्होंने उद्योग जगत की इस 'सुस्त' प्रतिक्रिया पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया है।

  • GSTAT में अब तक केवल 74,758 मामले दर्ज हुए हैं, जो अनुमानित 2.5 लाख का एक-तिहाई भी नहीं है।
  • अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा ने उद्योग जगत की 'सुस्त' प्रतिक्रिया पर चिंता जताई है।
  • पहली अपीलीय संस्था के पास लगभग 3.5 लाख मामले दर्ज थे, जिससे बड़ी संख्या में द्वितीय अपील की उम्मीद थी।

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण चिंता साझा की। बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित 'नेशनल टैक्सेशन समिट' में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण के संचालन के बाद से अपेक्षित मामलों की बाढ़ के बजाय, प्रतिक्रिया बेहद 'सुस्त' रही है।

मिश्रा ने बताया कि न्यायाधिकरण के सामने केवल 74,758 मामले ही दर्ज किए गए हैं, जबकि अनुमान लगाया गया था कि यह संख्या 2 से 2.5 लाख के बीच होगी। उन्होंने इस अंतर पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, "जब मैंने दर्ज मामलों और जनरेट किए गए टोकन की संख्या देखी, तो मैं थोड़ा निराश हुआ। मुझे नहीं पता कि संख्या इतनी कम क्यों है। हो सकता है कि व्यवसाय बंद हो गए हों या शायद ये फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के मामले रहे हों।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि GSTAT में कम अपीलें न केवल न्यायिक प्रक्रिया की गति को प्रभावित करती हैं, बल्कि यह करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच बढ़ते विवादों के समाधान की क्षमता पर भी सवाल उठाती हैं। यदि उद्योग जगत इन विवादों को सुलझाने के लिए न्यायाधिकरण का उपयोग नहीं करता है, तो इससे कर अनुपालन और व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

न्यायाधिकरण के सामने उम्मीद से कम मामले आना करदाताओं के बीच अनिश्चितता या कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति झिझक का संकेत हो सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, जीएसटी के लागू होने के बाद से कर विवादों को सुलझाने के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचे की आवश्यकता थी। पहली अपीलीय संस्था (कमिश्नर अपील्स स्तर) के पास लगभग 3.5 लाख मामले दर्ज किए गए थे। चूंकि ये मामले भौतिक (physical) मोड में दर्ज किए गए थे, इसलिए यह कहना कठिन है कि कितने मामलों का निपटारा किया गया, लेकिन संख्यात्मक रूप से GSTAT के पास बड़ी संख्या में द्वितीय अपील आने की प्रबल संभावना थी।

GSTAT ने विवादों को हल करने के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करने के उद्देश्य से अपना ई-फाइलिंग पोर्टल 24 सितंबर, 2025 को शुरू किया था। न्यायाधिकरण ने समय-सीमा समाप्त हो चुके (time-barred) मामलों के लिए भी राहत दी थी, जिससे व्यवसायों को 31 जुलाई, 2026 तक अपील करने का मौका मिला था।

Did You Know?: GSTAT एक द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण है, जो करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच के संघर्षों को सुलझाने के लिए एक केंद्रीय मंच के रूप में कार्य करता है।

Frequently Asked Questions

1. GSTAT का मुख्य कार्य क्या है?
GSTAT का मुख्य कार्य जीएसटी से संबंधित विवादों में करदाताओं और अधिकारियों के बीच द्वितीय अपील सुनना और विवादों का समाधान करना है।

2. अपीलों की संख्या कम होने के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
अध्यक्ष के अनुसार, इसके पीछे व्यवसायों का बंद होना या फर्जी ITC दावों की कमी जैसे कारण हो सकते हैं।