NSE F&O एक्सपायरी के दौरान कम प्रीमियम वाले ऑप्शंस में ट्रेड करने वाले निवेशकों के लिए बड़ी चेतावनी जारी की गई है। CNBC TV18 के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने ट्रेडर्स को सचेत किया है कि सस्ते प्रीमियम के चक्कर में लाखों का नुकसान हो सकता है।

  • कम प्रीमियम वाले ऑप्शंस (Out-of-the-money) में भारी जोखिम होता है।
  • एक्सपायरी के दौरान वोलैटिलिटी से बचना अनिवार्य है।
  • अनुज सिंघल ने ट्रेडर्स को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

भारतीय शेयर बाजार में NSE F&O (Futures and Options) एक्सपायरी के दौरान ट्रेडर्स के लिए जोखिम का स्तर काफी बढ़ जाता है। हालिया बाजार गतिविधियों को देखते हुए, CNBC TV18 के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। उन्होंने विशेष रूप से उन ट्रेडर्स को लक्षित किया है जो ₹3 से ₹4 जैसे बेहद कम प्रीमियम वाले ऑप्शंस में पैसा लगाते हैं।

बाजार के जानकारों का मानना है कि कम प्रीमियम वाले ऑप्शंस अक्सर 'आउट-ऑफ-द-मनी' (OTM) होते हैं, जिनकी एक्सपायरी के समय शून्य होने की संभावना बहुत अधिक होती है। ट्रेडर्स को लगता है कि वे कम लागत में बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं, लेकिन वास्तव में यह पूंजी के पूरी तरह डूबने का सबसे बड़ा कारण बनता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि रिटेल ट्रेडर्स अक्सर 'लॉट साइज' और 'कम लागत' के भ्रम में फंस जाते हैं। जब बाजार में अस्थिरता (Volatility) अधिक होती है, तो ये सस्ते प्रीमियम वाले कॉन्ट्रैक्ट्स बहुत तेजी से अपनी वैल्यू खो देते हैं। एक्सपायरी के दिन टाइम डिके (Theta Decay) की प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि ट्रेडर्स को संभलने का मौका भी नहीं मिलता।

कम प्रीमियम का मतलब सस्ता सौदा नहीं, बल्कि उच्च जोखिम वाला दांव है; एक्सपायरी के दिन सावधानी ही एकमात्र बचाव है।

ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि एक्सपायरी के दिनों में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव होता है। ऐसे में, बिना पर्याप्त स्टॉप-लॉस और स्ट्रैटेजी के ट्रेड करना आत्मघाती हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ट्रेडर्स को केवल उन्हीं कॉन्ट्रैक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनमें पर्याप्त लिक्विडिटी और 'इन-द-मनी' (ITM) या 'एट-द-मनी' (ATM) की संभावना हो।

Historical Background

F&O सेगमेंट में एक्सपायरी का खेल हमेशा से जोखिम भरा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, SEBI के आंकड़ों ने बार-बार दिखाया है कि अधिकांश रिटेल ट्रेडर्स डेरिवेटिव्स सेगमेंट में घाटे में रहते हैं। विशेष रूप से एक्सपायरी के दिन, ऑप्शन प्रीमियम का मूल्य तेजी से गिरता है, जिसे 'थीटा डिके' कहा जाता है।

Did You Know?: ऑप्शन ट्रेडिंग में 'थीटा' (Theta) वह कारक है जो समय बीतने के साथ ऑप्शन के मूल्य को कम करता है, जो एक्सपायरी के करीब सबसे घातक होता है।

Frequently Asked Questions

1. कम प्रीमियम वाले ऑप्शंस खतरनाक क्यों होते हैं?
क्योंकि इनके एक्सपायरी के समय शून्य (Zero) होने की संभावना बहुत अधिक होती है, जिससे पूरी निवेशित राशि डूब सकती है।

2. एक्सपायरी के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
ट्रेडर्स को हमेशा स्टॉप-लॉस का उपयोग करना चाहिए और केवल उन्हीं ऑप्शंस में ट्रेड करना चाहिए जिनमें पर्याप्त लिक्विडिटी हो।