भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने घोषणा की है कि FCNR(B), OFCB और ECB स्वैप सुविधाओं के माध्यम से कुल 72.85 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह प्राप्त हुआ है। यह कदम रुपये की गिरावट को रोकने के लिए उठाया गया था।
- कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह $72.85 बिलियन तक पहुँच गया है।
- FCNR(B) जमा राशि का सबसे बड़ा हिस्सा $64.40 बिलियन है।
- यह पहल रुपये की अस्थिरता और तेल आयात बिल को संतुलित करने के लिए की गई थी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शनिवार, 22 अगस्त, 2026 को एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त 2026 तक FCNR(B) जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) और ओवरसीज फॉरेन करेंसी बरोइंग (OFCB) के माध्यम से कुल $72.85 बिलियन का विदेशी मुद्रा प्रवाह उत्पन्न किया गया है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह का विस्तृत विवरण
अधिकृत डीलर बैंकों द्वारा आरबीआई को सौंपी गई जानकारी के अनुसार, इस भारी निवेश का वितरण इस प्रकार है: $64.40 बिलियन FCNR(B) जमा के रूप में, $4.86 बिलियन OFCBs के माध्यम से, और $2.59 बिलियन ECBs के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि वैश्विक निवेशकों ने भारतीय वित्तीय साधनों में गहरा विश्वास दिखाया है।
यह विशेष USD-INR फॉरेक्स स्वैप सुविधा 8 जून, 2026 को पेश की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना था, जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी और कच्चे तेल के बढ़ते आयात बिल के कारण दबाव में था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि आरबीआई का यह रणनीतिक कदम रुपये के मूल्य में होने वाली गिरावट को नियंत्रित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब भी वैश्विक बाजार में अनिश्चितता होती है, तो इस तरह की स्वैप सुविधाएं तरलता (liquidity) बनाए रखने में मदद करती हैं।
आरबीआई की यह हस्तक्षेपकारी नीति भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है।
मौजूदा योजना के तहत, FCNR(B) जमा के लिए खिड़की 31 अगस्त, 2026 तक खुली है, जबकि ECB और OFCB के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर, 2026 तक जारी रहेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने मुद्रा की अस्थिरता से निपटने के लिए समय-समय पर विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप का उपयोग किया है। 2013 के 'तपस' संकट के बाद से, आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन में अधिक सक्रिय और तकनीकी दृष्टिकोण अपनाना शुरू कर दिया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आरबीआई ने यह स्वैप सुविधा क्यों शुरू की?
उत्तर: रुपये की गिरावट और उच्च तेल आयात लागत के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए।
प्रश्न 2: यह सुविधा कब तक उपलब्ध है?
उत्तर: FCNR(B) के लिए 31 अगस्त तक और ECB/OFCB के लिए 31 दिसंबर 2026 तक।