भारत में एग्रीवोल्टाइक्स (Agrivoltaics) मॉडल उभर रहा है, जहाँ किसान सौर पैनलों के नीचे फसलें उगाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। हालांकि, उच्च लागत और नीतिगत बाधाएं इस क्रांति के रास्ते में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
- एग्रीवोल्टाइक्स मॉडल एक ही भूमि पर कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन दोनों की अनुमति देता है।
- राजस्थान के कुंजनपुरा में पहला किसान-स्वामित्व वाला 600 किलोवाट का एग्री-पीवी पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है।
- यह मॉडल किसानों की वार्षिक आय को 8 गुना तक बढ़ा सकता है, लेकिन शुरुआती निवेश बहुत अधिक है।
राजस्थान के जयपुर के पास स्थित कुंजनपुरा गाँव में, 60 वर्षीय कोजड़मल जाट का खेत अब पारंपरिक खेतों से बिल्कुल अलग दिखता है। जहाँ अन्य सौर फार्मों में भूमि खाली रहती है, वहीं जाट के खेत में सौर पैनलों की कतारों के नीचे मक्के की फसल लहलहा रही है। यह दृश्य भारत में उभरते हुए एग्रीवोल्टाइक्स (Agrivoltaics) मॉडल का एक जीवंत उदाहरण है।
एग्रीवोल्टाइक्स, जिसे एग्री-पीवी (Agri-PV) भी कहा जाता है, एक ऐसी तकनीक है जिसमें सौर पैनलों को जमीन से ऊंचाई पर लगाया जाता है ताकि उनके नीचे खेती की जा सके। यह मॉडल न केवल बिजली पैदा करता है, बल्कि पैनलों की छाया से मिट्टी की नमी भी बनी रहती है, जो शुष्क क्षेत्रों के लिए अत्यंत लाभकारी है। ICRIER के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर काम कर रहे जाट का 600 किलोवाट का यह पायलट प्रोजेक्ट अब लगभग 250 खेतों को सिंचाई के लिए बिजली प्रदान कर रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह तकनीक खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का एक क्रांतिकारी तरीका है। 2025 के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत की स्थिति को देखते हुए, उपजाऊ भूमि को पूरी तरह सौर फार्मों में बदलना जोखिम भरा हो सकता है। एग्रीवोल्टाइक्स इस जोखिम को कम करता है क्योंकि यह भूमि के दोहरे उपयोग की अनुमति देता है।
एग्रीवोल्टाइक्स केवल बिजली उत्पादन के बारे में नहीं है, बल्कि यह कृषि भूमि के मूल्य को अधिकतम करने और किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला बनाने के बारे में है।
हालाँकि, इस तकनीक के साथ आर्थिक चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। एक सामान्य सौर संयंत्र की तुलना में, एग्रीवोल्टाइक्स के लिए ऊंचे माउंटिंग स्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है, जिससे लागत लगभग ₹35 लाख बढ़ जाती है। यह भारी निवेश छोटे किसानों के लिए एक बड़ी बाधा है।
तुलनात्मक विश्लेषण: पारंपरिक सौर बनाम एग्रीवोल्टाइक्स
| विशेषता | पारंपरिक सौर फार्म | एग्रीवोल्टाइक्स (Agri-PV) |
|---|---|---|
| भूमि उपयोग | केवल बिजली उत्पादन | बिजली + कृषि (दोहरा उपयोग) |
| मिट्टी की नमी | वाष्पीकरण के कारण कम | छाया के कारण अधिक बनी रहती है |
| लागत | कम (Standard) | उच्च (Mounting Structures के कारण) |
| आय का स्रोत | केवल बिजली बिक्री | बिजली बिक्री + फसल बिक्री |
मध्य प्रदेश के किसान आनंद जैन जैसे नवाचारों ने दिखाया है कि कैसे पैनलों की ऊंचाई और दूरी को बदलकर खेती को संभव बनाया जा सकता है। ICRIER की हालिया रिपोर्ट 'सोलर एज़ अ थर्ड क्रॉप' (Solar as a Third Crop) इस बात पर जोर देती है कि सौर ऊर्जा को किसानों के लिए तीसरी फसल के रूप में देखा जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. एग्रीवोल्टाइक्स क्या है?
यह एक कृषि पद्धति है जिसमें सौर पैनलों के नीचे फसलें उगाई जाती हैं, जिससे एक ही जमीन से बिजली और भोजन दोनों प्राप्त होते हैं।
2. क्या यह तकनीक महंगी है?
हाँ, ऊंचे ढांचों के कारण इसकी स्थापना लागत पारंपरिक सौर संयंत्रों की तुलना में काफी अधिक होती है।