अमेरिका द्वारा कनाडाई सामानों पर 50% टैरिफ लगाने के बाद, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया है। यह व्यापार युद्ध दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को हिला सकता है।
- अमेरिका ने कनाडाई सामानों पर 50% टैरिफ लगाया है।
- कनाडा ने 'डॉलर-दर-डॉलर' जवाबी कार्रवाई का वादा किया है।
- प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने व्यापार वार्ता से बाहर निकलने का साहसी फैसला लिया है।
- ट्रंप प्रशासन ने 'टैरिफ एक्ट ऑफ 1930' का सहारा लिया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा वर्तमान में एक भीषण व्यापार युद्ध की दहलीज पर खड़े हैं। वाशिंगटन द्वारा लगभग 20 बिलियन डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले के बाद, ओटावा ने भी 'डॉलर-दर-डॉलर' जवाबी कार्रवाई करने की कड़ी चेतावनी दी है। अमेरिका की ओर से ये टैरिफ 22 अगस्त से लागू हो गए हैं, जबकि कनाडा की जवाबी कार्रवाई 8 सितंबर से प्रभावी होगी।
इस तनाव का मुख्य कारण हाल ही में विफल हुई व्यापार वार्ता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जो एक अनुभवी अर्थशास्त्री हैं, ने वार्ता के अंतिम चरण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावों को खारिज करते हुए बैठक से बाहर निकलने का निर्णय लिया। कार्नी का यह कदम उनके उस वादे के अनुरूप है जिसमें उन्होंने ट्रंप के दबाव के आगे न झुकने की शपथ ली थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल दो देशों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के लिए एक बड़ा खतरा है। कनाडा के कुल निर्यात का लगभग 72% अमेरिका जाता है, इसलिए इस युद्ध का असर सीधे तौर पर दोनों देशों के उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि कार्नी का यह रुख वैश्विक 'मिडल पावर्स' के लिए एक मिसाल बन सकता है जो बड़े देशों के आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन का तर्क: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अनुसार, यह कदम अमेरिकी श्रमिकों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की रक्षा के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कनाडा अमेरिका के लाभ लेना चाहता है लेकिन उसकी जिम्मेदारियां नहीं निभाना चाहता।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ कार्यक्रमों को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हालांकि, इस बार प्रशासन ने 'टैरिफ एक्ट ऑफ 1930' की धारा 338 का उपयोग किया है, जो राष्ट्रपति को उन देशों पर 50% तक शुल्क लगाने की शक्ति देती है जो अमेरिकी व्यवसायों के साथ भेदभाव करते हैं।
| विशेषता | अमेरिका का रुख | कनाडा का रुख |
|---|---|---|
| मुख्य कार्रवाई | 50% आयात शुल्क (टैरिफ) | जवाबी 'डॉलर-दर-डॉलर' शुल्क |
| लक्षित क्षेत्र | कनाडाई सामान (लकड़ी, ऑटो, स्टील) | डेयरी, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि |
| कानूनी आधार | टैरिफ एक्ट 1930 (धारा 338) | राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता |
Frequently Asked Questions
1. क्या यह टैरिफ अमेरिकी उपभोक्ताओं को प्रभावित करेंगे?
हाँ, आयात शुल्क बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ अंततः अमेरिकी ग्राहकों पर ही पड़ेगा।
2. मार्क कार्नी कौन हैं?
मार्क कार्नी एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं, जो बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के प्रमुख रह चुके हैं।