इंडीड के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के 60% पेशेवरों का मानना है कि उनके पद और वेतन के बीच कोई तालमेल नहीं है। कंपनियां कर्मचारियों को रोकने के लिए बड़े ओहदे तो दे रही हैं, लेकिन वास्तविक आर्थिक लाभ देने में विफल रही हैं।

  • भारत में 6 में से 10 पेशेवरों का वेतन उनके पद के अनुरूप नहीं है।
  • 52% लोग नई नौकरी चुनते समय पद के बजाय अधिक वेतन को प्राथमिकता देते हैं।
  • कंपनियां कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए 'टाइटल प्रमोशन' का सहारा ले रही हैं।
  • 70% लोगों का मानना है कि पद भविष्य के करियर अवसरों के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत के कॉर्पोरेट जगत में एक चौंकाने वाला चलन सामने आया है। इंडीड (Indeed) के नवीनतम त्रैमासिक हायरिंग ट्रैकर के अनुसार, देश के लगभग 60% पेशेवरों का कहना है कि उनके जॉब टाइटल और मिलने वाले वेतन के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। यह सर्वेक्षण दर्शाता है कि कार्यस्थलों पर 'पदनाम का अतिप्रयोग' (Title Inflation) एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है।

सर्वेक्षण में शामिल 80% पेशेवरों ने माना कि विभिन्न उद्योगों में पद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। कई कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहकर्मियों को बिना किसी वेतन वृद्धि के 'सीनियर' पद दे दिए गए हैं। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो पाया गया कि पदोन्नति पाने वाले लगभग एक-तिहाई लोगों की सैलरी में या तो कोई बढ़ोतरी नहीं हुई या फिर यह 5% से भी कम रही।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह स्थिति कॉर्पोरेट जगत में विश्वास की कमी पैदा कर सकती है। जब कंपनियां केवल 'टाइटल' देकर कर्मचारियों को संतुष्ट करने की कोशिश करती हैं, तो वे दीर्घकालिक वफादारी खो देती हैं। वेतन और जिम्मेदारी के बीच का यह असंतुलन अंततः टैलेंट रिटेंशन (कर्मचारियों को रोके रखने) की क्षमता को प्रभावित करता है।

ओहदा तब ज्यादा प्रभावी होता है जब वह वास्तविक करियर तरक्की को दिखाता है, न कि उसकी जगह लेता है। - शशि कुमार, प्रबंध निदेशक, इंडीड इंडिया

दिलचस्प बात यह है कि वेतन के बावजूद, पेशेवर अपने पदनाम को महत्व देते हैं। लगभग 73% लोगों का मानना है कि एक अच्छा पद संभावित नियोक्ताओं की नजर में उनकी छवि सुधारता है, और 70% इसे भविष्य के अवसरों के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

कंपनियों की रणनीति: वेतन के बजाय ओहदा

सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि 57% नियोक्ता कर्मचारियों को आकर्षित करने या उन्हें कंपनी में बनाए रखने के लिए वरिष्ठ ओहदे (Senior Titles) देने की रणनीति अपना रहे हैं। यह अक्सर तब होता है जब कंपनियों के पास वेतन बढ़ाने के लिए पर्याप्त बजट नहीं होता।

विशेषताकर्मचारी की प्राथमिकताकंपनी की रणनीति
मुख्य फोकसअधिक वेतन और जिम्मेदारीबड़ा पदनाम (Title) देना
उद्देश्यआर्थिक स्थिरता और करियर ग्रोथकर्मचारी प्रतिधारण (Retention)
प्रभावसंतुष्टि और वफादारीबजट की बचत
Did You Know?: भारत में 52% पेशेवर अब पद की तुलना में वेतन को नौकरी बदलने का मुख्य आधार मानते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कंपनियां केवल बड़े ओहदे क्यों दे रही हैं?
उत्तर: कंपनियां अक्सर कम सैलरी बजट होने के बावजूद अच्छे कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए उन्हें वरिष्ठ पदनाम देती हैं।

प्रश्न 2: क्या पदनाम वास्तव में करियर में मदद करता है?
उत्तर: हाँ, 73% लोगों का मानना है कि एक अच्छा पदनाम भविष्य में बेहतर करियर अवसर और बेहतर पेशेवर छवि प्रदान करता है।