पी.सी. मुस्तफ़ा, जिन्होंने बचपन में अपने पिता के साथ कूलीर का काम किया, अब iD Fresh Food के संस्थापक हैं और कंपनी का वार्षिक टर्नओवर ₹681 करोड़ तक पहुंच गया है। उनकी कहानी शिक्षा, दृढ़ संकल्प और उद्यमी सोच का प्रतीक है।

  • परिवार केवल ₹10 प्रतिदिन पर जीवित था
  • एक शिक्षक की मदद से शिक्षा पूरी की और IIM बेंगलुरु से MBA किया
  • iD Fresh Food की वार्षिक आय अब ₹681 करोड़ है

कॉफ़ी प्लांटेशन से क्लासरूम तक

केरल के वायनाड जिले के चेन्नालोडे में पले-बढ़े पी.सी. मुस्तफ़ा ने अपने पिता के साथ कॉफ़ी प्लांटेशन में कूलीर का काम किया। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी नाजुक थी कि रोज़ाना केवल ₹10 ही आय में आते थे।

एक शिक्षक का हस्तक्षेप

कक्षा 6 में असफलता के बाद स्कूल छोड़ने वाले मुस्तफ़ा को एक समर्पित शिक्षक ने खोजा। शिक्षक ने समझा कि आर्थिक कारण ही बाधा हैं और माता‑पिता को स्कूल वापस भेजने के लिए मनाया, साथ ही किताबों के खर्चे भी वह उठाए। इस दूसरे मौके ने मुस्तफ़ा के भविष्य को बदल दिया।

उच्च शिक्षा और विदेश में काम

मुस्तफ़ा ने फिर निट कैलिकट से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और बाद में आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए किया। पढ़ाई समाप्त होने के बाद उन्होंने सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के रूप में विदेश में कार्य किया, जिससे उन्हें व्यावसायिक दृष्टिकोण मिला।

iD Fresh Food की स्थापना

2005 में भारत लौटने के बाद, मुस्तफ़ा ने अपने चार चचेरे भाईयों के साथ बेंगलुरु के एक छोटे 50 वर्ग फुट रसोईघर से iD Fresh Food की शुरुआत की। उनका पहला उत्पाद था ताज़ा इडली‑डोसा बैटर, जिसका उद्देश्य शहरी परिवारों को सुविधाजनक ताज़ा बैटर उपलब्ध कराना था।

छोटे किचन से ₹681 करोड़ तक

आज iD Fresh Food इडली‑डोसा बैटर, परोटा, पनीर, दही, चटनी, सांबर, रेडी‑मिक्स और फ़िल्टर कॉफ़ी सहित विभिन्न उत्पादों की पेशकश करता है। कंपनी ने भारत के साथ-साथ यूएई, यूके, यूएस, सऊदी अरब, ओमान, क़तर, आयरलैंड और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कदम रखा है। FY25 में कंपनी की राजस्व ₹681.38 करोड़ तक पहुंची, जिसमें शुद्ध लाभ ₹50.75 करोड़ रहा।

सामाजिक प्रभाव और रोजगार सृजन

एक ऐसा व्यवसाय जो ग्रामीण भारत से कुशल श्रमिकों को रोजगार देता है, मुस्तफ़ा की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी उदाहरण है। उन्होंने अपने अनुभव को प्रेरणा बनाकर कई युवा उद्यमियों को मार्ग दिखाया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that such rags‑to‑rich narratives highlight the critical role of early educational intervention and the potential of Indian SMEs to scale globally, reinforcing policy focus on skill development and entrepreneurship support.

"शिक्षा में एक छोटी सी झलक भी बदलाव की दिशा बदल सकती है," कहते हैं शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. रवीना सिंह।
Did You Know?: iD Fresh Food की शुरुआत केवल चार लोग और एक छोटे किचन से हुई, लेकिन अब यह 1,500 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देती है।

Frequently Asked Questions

Q1: iD Fresh Food ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कैसे कदम रखा?
A: कंपनी ने अपने उत्पादों की ताज़गी और स्वच्छता को मानक बनाते हुए, UAE और सिंगापुर जैसे देशों में स्थानीय वितरकों के साथ साझेदारी की।

Q2: शुरुआती उद्यमियों को मुस्तफ़ा की कहानी से कौन‑सी सीख मिलती है?
A: शिक्षा में निवेश, दृढ़ता और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उत्पाद बनाना सफलता की कुंजी है।