CII TN सस्टेनेबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग समिट 2026 में उद्योग जगत के नेताओं ने बताया कि कैसे अपशिष्ट (waste) को पहचानकर कंपनियां बड़े निवेश से पहले ही भारी बचत कर सकती हैं।
- सस्टेनेबिलिटी को केवल कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
- ऊर्जा की बर्बादी को रोकने से परिचालन लागत में 70-80% तक की कमी आ सकती है।
- पुनर्चक्रण (Recycling) और संसाधन दक्षता सीधे तौर पर लाभ मार्जिन (EBITDA) को मजबूत करती है।
- डिजिटल तकनीक जैसे AR/VR और क्लाउड डेटा का उपयोग विनिर्माण त्रुटियों को कम करने में सहायक है।
चेन्नई में आयोजित CII TN सस्टेनेबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग समिट 2026 के दौरान, उद्योग विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण बात कही: सस्टेनेबिलिटी (सतत विकास) अब केवल नियमों का पालन करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह लागत कम करने और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने का एक शक्तिशाली साधन है। पैनल चर्चा 'मेकिंग सस्टेनेबिलिटी प्रॉफिटेबल: कटिंग コस्ट, क्रिएटिंग वैल्यू' में विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे कचरे की पहचान करना बड़े निवेश करने से पहले ही महत्वपूर्ण बचत दिला सकता है।
Festo के तकनीकी विशेषज्ञ टपन उपाध्याय ने ऊर्जा दक्षता पर जोर देते हुए कहा, "सबसे हरित ऊर्जा वह है जिसका आप उपयोग नहीं करते या जिसे आप बर्बाद नहीं करते।" उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए कि कैसे खराब तरीके से लगाए गए न्यूमेटिक ट्यूबिंग से प्रति मिनट 150 लीटर तक हवा का रिसाव हो सकता है, जिससे एक कंपनी को सालाना ₹1 लाख तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि घटकों (components) के आकार का सही चुनाव करके परिचालन लागत में 70-80% तक की कमी लाई जा सकती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में दक्षता अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि अस्तित्व का मामला है। कंपनियां जो आज ऊर्जा और संसाधनों के प्रबंधन में सुधार करती हैं, वे भविष्य में कार्बन टैक्स और सख्त पर्यावरणीय नियमों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी।
सस्टेनेबिलिटी को आज अपनाना कल की कानूनी अनिवार्यता को आज ही प्रबंधित करने जैसा है।
Amara Raja Group के मुख्य सस्टेनेबिलिटी अधिकारी, प्रशांत तिवारी ने सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उनकी बैटरी निर्माण प्रक्रिया में उपयोग होने वाला लगभग 85% लेड (Lead) पुनर्चक्रित स्रोतों से आता है। उन्होंने चेतावनी दी कि शून्य तरल निर्वहन (Zero Liquid Discharge) और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मानक जल्द ही कानूनी आवश्यकता बन जाएंगे, और जो कंपनियां पहले कदम उठाएंगी, वे बाजार में बढ़त हासिल करेंगी।
TAFE के अशोक मुथुस्वामी ने विनिर्माण में डिजिटल क्रांति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी कंपनी उत्पाद उत्पादन शुरू होने से पहले ही समस्याओं की पहचान करने के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) का उपयोग करती है। उन्होंने 'स्कोप 3' उत्सर्जन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई, जो कृषि उपकरणों के मामले में कुल उत्सर्जन का 98% हिस्सा होता है।
| रणनीति | पारंपरिक तरीका | सस्टेनेबल तरीका |
|---|---|---|
| ऊर्जा प्रबंधन | केवल उपयोग पर ध्यान | अपव्यय और रिसाव की पहचान |
| संसाधन उपयोग | नया कच्चा माल | पुनर्चक्रण और सर्कुलरिटी |
| तकनीक | भौतिक प्रोटोटाइप | AR/VR और डिजिटल सिमुलेशन |
Frequently Asked Questions
1. सस्टेनेबिलिटी से कंपनियों को आर्थिक लाभ कैसे होता है?
सस्टेनेबिलिटी ऊर्जा की बर्बादी को कम करके, कच्चे माल के पुनर्चक्रण से लागत घटाकर और परिचालन दक्षता बढ़ाकर सीधे मुनाफे में मदद करती है।
2. 'स्कोप 3' उत्सर्जन क्या है?
यह एक कंपनी के मूल्य श्रृंखला (Value Chain) के भीतर होने वाले अप्रत्यक्ष उत्सर्जन को संदर्भित करता है, जैसे कि उत्पाद का उपयोग और आपूर्ति श्रृंखला गतिविधियां।