भारतीय शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और खुदरा बाजार में कीमतें घटने की उम्मीद है। कीमतों में वृद्धि का कारण अटकलें, व्यापारी सट्टेबाज़ी और खराब मौसम से कम उत्पादन बताया गया।

  • भारत में चीनी की स्टॉक 35 लाख टन तक पहुंचेगी
  • सरकार ने 1 मिलियन टन कच्ची चीनी पर ड्यूटी‑फ्री आयात की अनुमति दी
  • अक्टूबर में मिलों की उत्पादन क्षमता 10‑12 लाख टन होगी

नई दिल्ली (24 अगस्त, 2026) – भारतीय शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और खुदरा कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। ISMA के अध्यक्ष निरज शिरगाओकर ने बताया कि कीमतों में अस्थायी उछाल मुख्यतः सट्टेबाज़ी, थोक खरीदारों की अति‑खरीद और खराब मौसम के कारण उत्पादन में गिरावट के कारण हुआ है।

शिरगाओकर ने यह भी कहा कि मिलें जानबूझकर कमी नहीं बना रही हैं और न ही उन्होंने एक्स‑मिल कीमतों को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 1 मिलियन टन कच्ची चीनी पर ड्यूटी‑फ्री आयात की अनुमति मिलने से बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों में स्थिरता आएगी।

वर्तमान में, सितंबर के अंत में भारत के पास लगभग 35 लाख टन चीनी का क्लोज़िंग स्टॉक है। इस स्टॉक को देखते हुए, ISMA ने आश्वासन दिया कि अक्टूबर के मध्य तक मिलें फिर से पूरी गति से चलेंगी और लगभग 10‑12 लाख टन चीनी का उत्पादन करेंगे। अक्टूबर की अनुमानित मांग 24‑25 लाख टन है, जिससे बाजार में संतुलन बनना चाहिए।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि निर्यातकों को भी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। कच्ची चीनी के आयात पर ड्यूटी‑फ्री नीति का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ तालमेल बिठाना और घरेलू बाजार में अस्थिरता को कम करना है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that stabilising sugar prices will have a ripple effect on the broader food inflation index, influencing everything from confectionery to beverage industries across the sub‑continent.

"ड्यूटी‑फ्री आयात नीति भारतीय शुगर मार्केट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाती है और मौसमी उतार‑चढ़ाव को संतुलित करती है," कहा कृषि अर्थशास्त्री डॉ. अनीता सिंह ने।
Did You Know?: भारत विश्व में सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता है, लेकिन उत्पादन में केवल 70% ही घरेलू मांग को पूरा करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या ड्यूटी‑फ्री आयात से भारतीय शुगर मिलों की आय पर असर पड़ेगा?
उत्तर: आयात से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे मिलों को लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।

प्रश्न 2: उपभोक्ताओं को कीमतों में गिरावट कब महसूस होगी?
उत्तर: विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो‑तीन महीनों में खुदरा कीमतों में स्पष्ट गिरावट देखी जाएगी।