सौर ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने के लिए SECI ने 500 MW के बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए देश का सबसे बड़ा टेंडर जारी किया है। यह कदम 2030 तक 500 GW अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
- SECI ने 500 MW/1000 MWh के स्टैंडअलोन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के लिए टेंडर जारी किया।
- यह भारत के 2030 तक 500 GW अक्षय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य का पहला चरण है।
- परियोजनाएं राजस्थान के फतेहगढ़-III ग्रिड-सबस्टेशन के पास स्थापित की जाएंगी।
भारत सरकार ने देश के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SECI), जो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का निकाय है, ने 500 MW/1000-MWh के स्टैंडअलोन बैटरी ऊर्जा भंडारण सिस्टम (BESS) की स्थापना के लिए टेंडर जारी किया है। यह देश में अपनी तरह का पहला टेंडर है, जो बिजली वितरण कंपनियों को 'ऑन-डिमांड' आधार पर भंडारण सुविधाएं प्रदान करेगा।
यह टेंडर सरकार के उस तात्कालिक लक्ष्य का हिस्सा है जिसके तहत राष्ट्रीय ग्रिड में अधिक नवीकरणीय ऊर्जा इंजेक्ट करने के लिए 4000 MWh की बैटरी भंडारण क्षमता स्थापित की जानी है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने सिफारिश की है कि 2029-30 तक स्थापित क्षमता में 27,000 MW/108,000 MWh (4-घंटे का भंडारण) का हिस्सा होना चाहिए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती इसकी अनिश्चितता है—सूरज केवल दिन में चमकता है। BESS सिस्टम सौर ऊर्जा को दिन में स्टोर कर सकते हैं और शाम या रात के समय उपयोग के लिए उपलब्ध करा सकते हैं। इससे कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम होगी और ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी।
बैटरी स्टोरेज तकनीक सौर ऊर्जा को एक विश्वसनीय और निरंतर ऊर्जा स्रोत में बदल देगी, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लासगो में COP शिखर सम्मेलन के दौरान 2030 तक 500 GW अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2040 तक भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी भंडारण क्षमता (लगभग 140 GW) होगी। हालांकि, विशेषज्ञों ने लिथियम-आयन बैटरी की उच्च लागत और आग लगने के खतरों जैसी चुनौतियों के प्रति भी आगाह किया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत ने दशकों से ऊर्जा के लिए कोयले पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए हैं। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति तेजी से हुई है, लेकिन ग्रिड को संतुलित करने के लिए 'स्टोरेज' हमेशा से एक बड़ी बाधा रही है। यह टेंडर उस बाधा को दूर करने की दिशा में एक रणनीतिक मोड़ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. SECI टेंडर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों को मांग पर उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करना है।
2. यह परियोजना कहाँ स्थित होगी?
ये परियोजनाएं राजस्थान के फतेहगढ़-III ग्रिड-सबस्टेशन के पास स्थापित की जाएंगी।