केंद्र सरकार की 'कंदा एक्सप्रेस' के जरिए दिल्ली में प्याज की कीमतें कम करने की योजना को भारी असफलता का सामना करना पड़ रहा है। सड़े हुए स्टॉक और ट्रेन में देरी के कारण लक्ष्य से आधा ही प्याज भेजा जा सका है।

  • केंद्र की 'कंदा एक्सप्रेस' योजना में भारी रुकावट, 5 में से 4 ट्रेनें रद्द।
  • लासलगाँव गोदाम में 60-70% प्याज खराब और सड़ा हुआ पाया गया।
  • 840 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 450 मीट्रिक टन प्याज ही भेजा जा सका।
  • किसानों ने खराब गुणवत्ता वाले प्याज को दिल्ली भेजने का किया कड़ा विरोध।

केंद्र सरकार की दिल्ली में प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की महत्वाकांक्षी योजना, जिसे 'कंदा एक्सप्रेस' के नाम से जाना जाता है, गंभीर संकट में फंस गई है। नासिक के लासलगाँव से दिल्ली तक प्याज पहुंचाने के लिए प्रस्तावित पांच विशेष ट्रेनों में से चार को रद्द कर दिया गया है, जबकि दिल्ली के आदर्श नगर जाने वाली एकमात्र ट्रेन को लगभग 26 घंटे की देरी से रवाना किया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार का लक्ष्य 840 मीट्रिक टन प्याज की आपूर्ति करना था, लेकिन गुणवत्ता संबंधी चिंताओं के कारण केवल 450 मीट्रिक टन ही भेजा जा सका। यह स्थिति तब आई है जब पिछले 15 दिनों में दिल्ली में प्याज की कीमतें 35 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। सरकार ने NAFED और NCCF द्वारा किसानों से खरीदे गए बफर स्टॉक का उपयोग करके कीमतों को नियंत्रित करने का वादा किया था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संकट केवल परिवहन की समस्या नहीं है, बल्कि यह सरकारी खरीद और भंडारण प्रणाली की विफलता को दर्शाता है। यदि बफर स्टॉक ही खराब गुणवत्ता का होगा, तो उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय यह केवल बाजार में भ्रम पैदा करेगा और किसानों की छवि को भी नुकसान पहुंचाएगा।

गुणवत्ता मानकों की अनदेखी न केवल उपभोक्ताओं को धोखा देने जैसा है, बल्कि यह सरकारी खरीद प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, लासलगाँव-मनमाड रोड पर स्थित Central Warehousing Corporation (CWC) के गोदाम में रखे प्याज की स्थिति भयावह है। निरीक्षण में पाया गया कि गोदाम में रखे स्टॉक का लगभग 60-70% हिस्सा खराब हो चुका है। वहां काम कर रहे कर्मचारी मंगलवार से ही अच्छे और खराब प्याज को अलग करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर लग रही थी।

इस बीच, किसान गणेश निंबालकर ने ट्रेन के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली भेजे जा रहे प्याज का आकार बहुत छोटा (10-20 मिमी) है और उनमें सड़ा हुआ माल भी शामिल है। किसानों का तर्क है कि दिल्ली के उपभोक्ताओं को खराब गुणवत्ता वाला प्याज क्यों दिया जाए, जबकि किसान बेहतर गुणवत्ता वाले 45 मिमी के प्याज उपलब्ध कराने को तैयार हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में प्याज एक आवश्यक वस्तु है और इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव अक्सर राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। सरकार आमतौर पर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए NAFED और NCCF के माध्यम से बफर स्टॉक का उपयोग करती है, लेकिन भंडारण सुविधाओं की कमी और खराब प्रबंधन के कारण अक्सर स्टॉक खराब हो जाता है।

Did You Know?: प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए विशेष वेंटिलेशन और तापमान नियंत्रण की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी अक्सर भारतीय गोदामों में देखी जाती है।

Frequently Asked Questions

1. कंदा एक्सप्रेस क्या है?
यह एक विशेष ट्रेन सेवा है जिसे नासिक से दिल्ली तक प्याज की आपूर्ति करने और कीमतों को कम करने के लिए शुरू किया गया था।

2. प्याज की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
आपूर्ति में कमी और खराब भंडारण के कारण प्याज की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ रहा है।