पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण कर्नाटक में 36,000 से अधिक नए एलपीजी कनेक्शनों पर रोक लग गई है। सरकार ने मौजूदा उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन उपाय लागू किए हैं।
- पश्चिम एशिया युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आयात प्रभावित हुआ।
- कर्नाटक में 36,069 नए एलपीजी कनेक्शनों के आवेदन लंबित हैं।
- सरकार ने नए कनेक्शनों के बजाय 5-किग्रा के फ्री ट्रेड सिलेंडर देने का निर्देश दिया है।
- उपभोक्ताओं के बीच जमाखोरी रोकने के लिए रिफिल के बीच अंतराल अनिवार्य किया गया है।
पश्चिम एशिया में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका सीधा असर भारत के विभिन्न राज्यों में देखने को मिल रहा है। कर्नाटक में, युद्ध के कारण समुद्री व्यापारिक मार्ग, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बाधित होने से नए एलपीजी कनेक्शनों की जारी करने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
हाल ही में विधान परिषद में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रिज़वान अरशद ने खुलासा किया कि अप्रैल 2026 से अब तक राज्य में लगभग 36,069 नए एलपीजी कनेक्शनों के आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो वर्तमान में लंबित हैं। युद्ध के कारण आपूर्ति में आई कमी को देखते हुए, केंद्र सरकार के निर्देशों के पालन में राज्य सरकार ने मौजूदा उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी है।
संकट प्रबंधन और सरकार के कदम
आपूर्ति की कमी से निपटने के लिए सरकार ने कई कड़े और रणनीतिक निर्णय लिए हैं। मंत्री अरशद के अनुसार, नए 14.2-किग्रा के कनेक्शन जारी करने के बजाय, गैस एजेंसियों को उन उपभोक्ताओं को 5-किग्रा के 'फ्री ट्रेड एलपीजी' सिलेंडर प्रदान करने की सलाह दी गई है जिन्होंने नए कनेक्शन के लिए आवेदन किया था।
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि ऊर्जा संकट के दौरान संसाधनों का प्रबंधन कितना महत्वपूर्ण है। सरकार ने न केवल घरेलू आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि C3 और C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम, जो आमतौर पर पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए उपयोग किए जाते हैं, उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर घरेलू एलपीजी आपूर्ति के लिए मोड़ दिया है।
युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधा ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है।
इसके अतिरिक्त, जमाखोरी और अवैध उपयोग को रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को लागू किया गया है। सरकार ने शहरी क्षेत्रों में दो रिफिल के बीच न्यूनतम 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर अनिवार्य कर दिया है ताकि उपभोक्ता अतिरिक्त सिलेंडर बुक न कर सकें।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भर रहा है। पश्चिम एशिया, विशेष रूप से खाड़ी देशों के साथ होने वाले भू-राजनीतिक संघर्षों ने अतीत में भी भारत की ऊर्जा कीमतों और उपलब्धता को अस्थिर किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदुओं में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
उपलब्धता की तुलना
| विशेषता | शहरी क्षेत्र | ग्रामीण क्षेत्र |
|---|---|---|
| न्यूनतम रिफिल अंतराल | 25 दिन | 45 दिन |
| प्राथमिकता | घरेलू रसोई | घरेलू रसोई |
| वैकल्पिक ऊर्जा सुझाव | PNG/बिजली | PNG/बिजली |
Frequently Asked Questions
1. नए एलपीजी कनेक्शन कब शुरू होंगे?
मंत्री के अनुसार, जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होगी, नए कनेक्शन प्रदान करना शुरू कर दिया जाएगा।
2. सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए क्या किया है?
सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादकों से उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया है और पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक को घरेलू उपयोग के लिए मोड़ दिया है।