भारत का प्लांट-प्रोटीन इंग्रीडिएंट्स बाजार अगले पांच वर्षों में दोगुना होकर ₹9,000 करोड़ तक पहुंचने की राह पर है। बढ़ती पोषण संबंधी जागरूकता और आयात पर निर्भरता कम करने के अवसरों के कारण इस क्षेत्र में भारी निवेश की संभावनाएं दिख रही हैं।
- भारत का प्लांट-प्रोटीन बाजार 2031 तक ₹9,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
- वर्तमान में भारत अपनी जरूरत के 90% प्लांट-प्रोटीन आयात करता है।
- एक मध्यम स्तर की निष्कर्षण इकाई (Extraction Facility) स्थापित करने के लिए ₹200-250 करोड़ के निवेश की आवश्यकता हो सकती है।
- प्लांट-आधारित खाद्य क्षेत्र 18% की वार्षिक दर (CAGR) से बढ़ रहा है।
भारत में खान-पान की आदतों में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब उपभोक्ता केवल कैलोरी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, बल्कि पोषण और प्रोटीन की गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का प्लांट-प्रोटीन इंग्रीडिएंट्स बाजार वर्तमान ₹4,500 करोड़ से बढ़कर अगले पांच वर्षों में ₹9,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
मुंबई में आयोजित 'Fi India & ProPak India 2026' कार्यक्रम के दौरान, प्लांट बेस्ड फूड्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (PBFIA) के कार्यकारी निदेशक प्रवीर श्रीवास्तव ने बताया कि प्लांट-आधारित खाद्य क्षेत्र लगभग 18% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है। यह वैश्विक विकास दर (7-8%) की तुलना में काफी अधिक है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के लिए यह क्षेत्र न केवल स्वास्थ्य के लिए बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वर्तमान में, भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 90% प्लांट-प्रोटीन आयात करता है, जो घरेलू विनिर्माण के लिए एक विशाल अवसर पैदा करता है। यदि भारत अपनी कृषि शक्ति का उपयोग करके घरेलू उत्पादन बढ़ाता है, तो वह न केवल आयात पर निर्भरता कम कर सकता है बल्कि वैश्विक निर्यातक भी बन सकता है।
भारत में प्लांट-आधारित खाद्य क्षेत्र 18% की दर से बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि एक प्लांट-प्रोटीन निष्कर्षण इकाई, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 10-15 टन हो, स्थापित करने के लिए ₹200-250 करोड़ के पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। यह इस उद्योग की पूंजी-गहन प्रकृति को दर्शाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास
पारंपरिक रूप से भारत एक शाकाहारी प्रधान देश रहा है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं ने 'फंक्शनल फूड' और 'न्यूट्रास्युटिकल' की मांग बढ़ा दी है। पहले प्रोटीन का मुख्य स्रोत केवल दालें और डेयरी उत्पाद थे, लेकिन अब सोया, मटर और अन्य पौधों से प्राप्त प्रोटीन का उपयोग व्यापक रूप से खाद्य प्रसंस्करण में किया जा रहा है।
मारिको (Marico) के तकनीकी नियामक मामलों के प्रमुख डॉ. प्रबोध हल्दे के अनुसार, भारत का व्यापक खाद्य सामग्री बाजार ₹85,000 करोड़ का है, जिसमें प्राकृतिक सामग्री का हिस्सा 30-35% है। उन्होंने जोर दिया कि अगला विकास चरण मूल्यवर्धन (Value Addition) और किसानों के साथ बेहतर एकीकरण पर केंद्रित होना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. भारत प्लांट-प्रोटीन के लिए कितना आयात करता है?
वर्तमान में, भारत में उपयोग किए जाने वाले लगभग 90% प्लांट-प्रोटीन इंग्रीडिएंट्स आयात किए जाते हैं।
2. प्लांट-प्रोटीन बाजार के विकास की दर क्या है?
भारत में प्लांट-आधारित खाद्य क्षेत्र लगभग 18% CAGR की दर से बढ़ रहा है।