भारत की यूपीआई क्रांति तेजी से बढ़ रही है, लेकिन एक नई रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं अभी भी इस डिजिटल बदलाव का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही हैं। अध्ययन से पता चलता है कि केवल स्मार्टफोन होना ही काफी नहीं है; विश्वास और वित्तीय नियंत्रण भी बड़ी बाधाएं हैं।

  • यूपीआई (UPI) के बढ़ते उपयोग के बावजूद, महिलाओं की भागीदारी में भारी अंतर है।
  • केवल स्मार्टफोन और बैंक खाता होना डिजिटल वित्तीय समावेशन के लिए पर्याप्त नहीं है।
  • विश्वास की कमी, सामाजिक मानदंड और वित्तीय नियंत्रण का अभाव मुख्य बाधाएं हैं।
  • 123PAY जैसे IVR-आधारित समाधान महिलाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल लेनदेन के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। जहां एक ओर वैश्विक नेता भारत की इस तकनीक की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। हैदराबाद स्थित एनजीओ युगांतर (Yugantar) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति में महिलाएं अभी भी काफी पीछे छूट गई हैं।

डिजिटल डिवाइड: केवल तकनीक की कमी नहीं, बल्कि भरोसे का मामला

अध्ययन, जो CSI Transactions on ICT में प्रकाशित हुआ है, यह स्पष्ट करता है कि महिलाओं के लिए यूपीआई का उपयोग करना केवल तकनीकी साक्षरता का विषय नहीं है। हैदराबाद की एक चाय विक्रेता, पुजारी लक्ष्मी की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है। उनके पास यूपीआई क्यूआर कोड तो है, लेकिन लेनदेन उनके पति या बच्चे करते हैं। लक्ष्मी का कहना है, "अगर पैसा गलत खाते में चला गया तो क्या होगा?" यह डर और आत्मविश्वास की कमी डिजिटल समावेशन के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।

बोजोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण दिखाता है कि महिलाओं के बीच यूपीआई अपनाने की प्रक्रिया तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित है। पहली श्रेणी उन शिक्षित और युवा महिलाओं की है जो तकनीक का सहज उपयोग करती हैं। दूसरी श्रेणी वे महिलाएं हैं जो संरचनात्मक और सामाजिक बाधाओं के कारण डिजिटल सेवाओं का उपयोग नहीं कर पातीं। तीसरी श्रेणी उन महिलाओं की है जो वित्तीय नियंत्रण खोने के डर से सक्रिय रूप से यूपीआई को अस्वीकार करती हैं।

डिजिटल वित्तीय समावेशन के लिए केवल स्मार्टफोन देना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए महिलाओं में आत्मविश्वास और वित्तीय स्वायत्तता पैदा करना अनिवार्य है।

तकनीकी समाधान और भविष्य की राह

अध्ययन में पाया गया कि 123PAY जैसी इंटरैक्टिव वॉयस रिस्पांस (IVR) आधारित प्रणालियाँ उन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं जो स्मार्टफोन आधारित ऐप्स चलाने में कठिनाई महसूस करती हैं। यह तकनीक बिना इंटरनेट या जटिल ऐप इंटरफेस के भी काम कर सकती है।

ऐतिहासिक रूप से, भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार अभूतपूर्व रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल लेनदेन 2021-22 के ₹8,839 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹18,737 करोड़ हो गए हैं। हालांकि, इस विकास का लाभ हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाओं तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।

Did You Know?: भारत में कुल डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी 2018-19 में केवल 17% थी, जो 2023-24 तक बढ़कर लगभग 70% हो गई है।

Frequently Asked Questions

1. महिलाओं के लिए यूपीआई अपनाने में मुख्य बाधा क्या है?
मुख्य बाधाओं में तकनीकी आत्मविश्वास की कमी, वित्तीय नियंत्रण खोने का डर और सामाजिक मानदंड शामिल हैं।

2. 123PAY क्या है?
यह एक IVR-आधारित प्रणाली है जो उन लोगों के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाती है जो स्मार्टफोन ऐप्स का उपयोग करने में सहज नहीं हैं।