तिरुपुर में BPCL की IDPL पाइपलाइन परियोजना के काम में बाधा डालने के आरोप में 24 किसानों को गिरफ्तार किया गया है। किसान मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन विरोध पर हैं।
- BPCL की IDPL पाइपलाइन परियोजना के विरोध में 12 पुरुष और 12 महिला किसानों को गिरफ्तार किया गया।
- किसान मुआवजे को बाजार मूल्य का 500% करने की मांग कर रहे हैं।
- सरकार ने मुआवजा बढ़ाकर 125% (बाजार मूल्य का) किया है, लेकिन किसान इसे अपर्याप्त मान रहे हैं।
- पुलिस सुरक्षा के बीच परियोजना का काम फिर से शुरू किया गया है।
तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। शनिवार, 29 अगस्त, 2026 को पोसारिपलायम के कांडियनकोविल पंचायत में BPCL (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की IDPL (इरुगुर से देवनागोंथी पाइपलाइन) परियोजना के काम में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने 24 किसानों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए किसानों में 12 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं।
गिरफ्तारी के बाद, किसानों को पल्लाडम-धरापुरम रोड स्थित एक सामुदायिक हॉल में हिरासत में लिया गया, जहां उन्होंने देर रात तक भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों के पूरा होने तक विरोध जारी रखेंगे और रिहाई आदेश मिलने के बावजूद भी पीछे नहीं हटेंगे। वर्तमान में, पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच परियोजना का काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुआवजे का विवाद: क्या है मुख्य मुद्दा?
विवाद की जड़ भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित मुआवजे की राशि है। यह 74 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन कोयंबटूर और तिरुपुर जिलों की निजी भूमि से होकर गुजरेगी। सरकार ने पहले अतिरिक्त भूमि के लिए बाजार मूल्य का 20% मुआवजा तय किया था, जिसे बाद में विशेष मामले के रूप में बढ़ाकर 100% कर दिया गया।
किसानों के बढ़ते दबाव के बाद, BPCL ने बाजार दर के 100% के ऊपर प्रति एकड़ ₹5 लाख की अतिरिक्त राहत देने पर सहमति व्यक्त की है, जो कुल मिलाकर 125% बैठता है। हालांकि, आवासीय और औद्योगिक भूमि के लिए मुआवजा 100% पर ही स्थिर रखा गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष बुनियादी ढांचे के विकास और कृषि हितों के बीच बढ़ते असंतुलन को दर्शाता है। जब तक मुआवजे की संरचना में पारदर्शिता और किसानों की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक इस तरह के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में देरी और सामाजिक अशांति की संभावना बनी रहेगी।
विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों की आर्थिक सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए ताकि सामाजिक संघर्ष को टाला जा सके।
तमिलनाडु किसान संरक्षण आंदोलन के तिरुपुर जिला सचिव, एन. रमेश ने सरकार द्वारा घोषित मुआवजे को 'नगण्य' करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक मुआवजे को बाजार मूल्य के 500% तक नहीं बढ़ाया जाता, तब तक इस परियोजना का विरोध जारी रहेगा और काम को रोका जाएगा।
Frequently Asked Questions
1. किसान किस मुआवजे की मांग कर रहे हैं?
किसान चाहते हैं कि उन्हें बाजार मूल्य का 500% मुआवजा दिया जाए।
2. IDPL परियोजना क्या है?
यह इरुगुर से देवनागोंथी तक जाने वाली एक महत्वपूर्ण पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजना है जिसे BPCL द्वारा संचालित किया जा रहा है।