नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बिजली बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसके कारण अब काठमांडू ने भारत से बिजली आयात के लिए समय से पहले मंजूरी मांगी है।
- नेपाल में बाढ़ के कारण बिजली उत्पादन क्षमता में 550 मेगावाट की कमी आई है।
- काठमांडू ने भारत से सितंबर से ही बिजली आयात की मंजूरी देने का अनुरोध किया है।
- भारत का ग्रिड नेपाल की इस कमी को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।
नेपाल में आई हालिया विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने देश के बिजली बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस संकट के बीच, काठमांडू ने भारत सरकार से बिजली के पारेषण (transmission) के लिए आवश्यक मंजूरियों को सामान्य से पहले देने का अनुरोध किया है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नेपाल ने इस आपदा के कारण पैदा हुए उत्पादन घाटे की भरपाई के लिए सितंबर माह से ही बिजली आयात की अनुमति मांगी है।
आमतौर पर, नेपाल सर्दियों के महीनों (अक्टूबर से) में भारत से बिजली आयात करता है, क्योंकि हिमालयी क्षेत्रों में ठंड के कारण जल विद्युत उत्पादन कम हो जाता है। इसके विपरीत, गर्मियों के दौरान नेपाल अपनी अतिरिक्त बिजली भारत को निर्यात करता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने नेपाल से 3,299 मिलियन यूनिट (MU) बिजली आयात की, जबकि नेपाल को 1,451 MU बिजली निर्यात की।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संकट न केवल नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में ऊर्जा सहयोग की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई इस बाढ़ ने लगभग 675 लोगों की जान ले ली है और बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंचाई है।
नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता में 550 मेगावाट की गिरावट ने द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार के समीकरण को बदल दिया है।
आंतरिक मूल्यांकन के अनुसार, बाढ़ के कारण नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता में लगभग 550 मेगावाट की गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप, भारत को होने वाला बिजली निर्यात भी लगभग 400 मेगावाट कम हो गया है, जो पहले 950-1000 मेगावाट के बीच रहता था। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि भारत का विशाल राष्ट्रीय ग्रिड इस कमी को बिना किसी व्यवधान के संभालने में सक्षम है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और नेपाल के बीच बिजली व्यापार दशकों पुराना है। नेपाल अपनी जल-विद्युत क्षमता का उपयोग करके भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा भागीदार बन गया है। हालांकि, हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी आपदाएं इस ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए निरंतर चुनौती बनी हुई हैं।
Frequently Asked Questions
1. नेपाल ने भारत से जल्दी बिजली क्यों मांगी है?
बाढ़ के कारण नेपाल के बिजली बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे उत्पादन क्षमता में कमी आई है।
2. क्या भारत में बिजली की कमी होगी?
नहीं, भारतीय अधिकारियों के अनुसार भारत का ग्रिड 400 मेगावाट की कमी को आसानी से संभालने में सक्षम है।