मेसकॉम के अध्यक्ष के. हरीश कुमार ने खुलासा किया है कि ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों पर बिजली आपूर्ति के लिए ₹305.84 करोड़ का भारी बकाया है। कंपनी भारी बारिश और खराब मौसम के कारण वित्तीय संकट का सामना कर रही है।

  • ग्राम पंचायतों पर ₹298.19 करोड़ और शहरी निकायों पर ₹7 करोड़ का बकाया है।
  • भारी बारिश और हवाओं के कारण मेसकॉम को ₹25.77 करोड़ का नुकसान हुआ है।
  • वन क्षेत्रों और हाथी गलियारों में सुरक्षा के लिए नई बिजली लाइनें बिछाई जाएंगी।
  • मंगलुरु में निर्बाध बिजली के लिए 33 kV भूमिगत लाइन बिछाई जाएगी।

मंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, मेसकॉम (MESCOM) के अध्यक्ष के. हरीश कुमार ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) पर बिजली आपूर्ति के बदले कुल ₹305.84 करोड़ का बकाया है। यह राशि मुख्य रूप से स्ट्रीटलाइट्स और जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन के लिए उपयोग की जाने वाली बिजली से संबंधित है।

विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, ग्राम पंचायतों पर ₹298.19 करोड़ का भारी कर्ज है, जबकि शहरी स्थानीय निकायों को अभी ₹7 करोड़ का भुगतान करना बाकी है। यह वित्तीय बोझ मेसकॉम के परिचालन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

प्राकृतिक आपदा और वित्तीय नुकसान

अध्यक्ष ने यह भी बताया कि इस वर्ष 1 अप्रैल से 26 अगस्त के बीच अत्यधिक तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कंपनी को ₹25.77 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ है। इस अवधि के दौरान लगभग 17,770 बिजली के खंभे और 496.37 किलोमीटर लंबी बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। सबसे अधिक नुकसान चिकमगलूर, दक्षिण कन्नड़ और शिवमोग्गा जिलों में देखा गया है।

स्थानीय निकायों द्वारा बिजली बिलों का समय पर भुगतान न करना क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से खतरे में डाल रहा है।

बुनियादी ढांचे में सुधार और भविष्य की योजनाएं

मेसकॉम ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कंपनी ने हाथी गलियारों और वन क्षेत्रों में मौजूदा बिजली लाइनों को कवर्ड कंडक्टरों (Covered Conductors) से बदलने का निर्णय लिया है। यह परियोजना पुत्तूर, शिवमोग्गा, सागर, चिकमगलूर, कोप्पा और कुंदपुर जैसे क्षेत्रों में शुरू की जाएगी ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मंगलुरु शहर की बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाने के लिए, कवूर और उरवा मार्केट के बीच एक 33 kV भूमिगत बिजली लाइन बिछाई जाएगी। इसके अलावा, उल्लाल, मन्नागुड्डा और कवूर जैसे क्षेत्रों में ओवरहेड लाइनों को भूमिगत लाइनों से बदला जा रहा है।

तकनीकी उन्नयन और सुरक्षा

कंपनी ने खराब हो चुके ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए 5,450 नए ट्रांसफार्मर खरीदने की भी मंजूरी दी है। लाइनमैन की सुरक्षा के लिए 705 नॉन-कॉन्टैक्ट वोल्टेज डिटेक्टर और भूमिगत केबल फॉल्ट लोकेटर के लिए एक विशेष वाहन की खरीद को भी हरी झंडी दे दी गई है। साथ ही, उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर उपलब्ध कराने के लिए अगले पांच वर्षों तक 14 दुकानें खोलने की योजना है।

Did You Know?: भूमिगत बिजली लाइनें न केवल बारिश में बिजली कटौती को कम करती हैं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी अधिक सुरक्षित रहती हैं।

Frequently Asked Questions

1. मेसकॉम को सबसे ज्यादा नुकसान किन जिलों में हुआ है?
सबसे अधिक नुकसान चिकमगलूर, दक्षिण कन्नड़ और शिवमोग्गा जिलों में हुआ है।

2. हाथी गलियारों में बिजली लाइनों को क्यों बदला जा रहा है?
वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों को करंट लगने से बचाने के लिए लाइनों को कवर्ड कंडक्टरों से बदला जा रहा है।