भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उपक्रम BRBNMPL ने पॉलीमर नोटों की आपूर्ति के लिए बोली प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर बेहद सख्त शर्तें रखी गई हैं।

  • पॉलीमर नोटों की आपूर्ति के लिए भारतीय और विदेशी कंपनियों ने बोली लगाई है।
  • कंपनियों को चीन और पाकिस्तान के साथ अपने व्यावसायिक संबंधों को अलग रखने (firewall) का वचन देना होगा।
  • नोटों में किसी भी प्रकार के पशु वसा (animal tallow) या उसके DNA के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
  • शुरुआत में 10 और 20 रुपये के नोटों को पॉलीमर से बदलने की योजना है।

भारत में कम मूल्य वाले पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों को पेश करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण (P) लिमिटेड (BRBNMPL) ने सुरक्षा फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की आपूर्ति के लिए वैश्विक स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की हैं। इस प्रक्रिया में भारतीय फर्मों और वैश्विक दिग्गज कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है।

इस निविदा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सुरक्षा और संवेदनशीलता संबंधी शर्तें हैं। कंपनियों को एक 'इंटीग्रिटी पैक्ट' (Integrity Pact) भरना पड़ रहा है, जिसमें उन्हें यह गारंटी देनी होगी कि उनके संचालन का चीन और पाकिस्तान में मौजूद उनके व्यावसायिक कार्यों से कोई संबंध नहीं होगा। यह कदम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और मुद्रा की अखंडता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह कदम केवल मुद्रा के आधुनिकीकरण के बारे में नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक जोखिमों और सामाजिक संवेदनशीलता के प्रबंधन के बारे में भी है। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से 'फायरवॉल' बनाना यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय मुद्रा की आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न हो सके।

मुद्रा की आपूर्ति श्रृंखला में चीन और पाकिस्तान से पूर्ण अलगाव भारत की आर्थिक संप्रभुता के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है।

एक अन्य बड़ा मुद्दा धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा है। बोलीदाताओं को यह प्रमाणित करना अनिवार्य है कि उनके पॉलीमर सबस्ट्रेट में किसी भी प्रकार के पशु वसा (animal tallow) या उसके DNA का उपयोग नहीं किया गया है। ब्रिटेन जैसे देशों में नोटों में पशु वसा की मौजूदगी पर हुए विवादों के कारण आरबीआई इस मामले में बेहद सतर्क है, ताकि भारतीय समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

प्रतिस्पर्धा की बात करें तो, यूके स्थित De La Rue के साथ साझेदारी कर रही भारतीय कंपनी Cosmo First ने इस दौड़ में अपनी जगह बनाई है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया की CCL Secure, जो दुनिया के 40 केंद्रीय बैंकों को आपूर्ति करती है, ने भी बोली लगाई है। वियतनाम की Q&T Hi-tech Polymer भी इस दौड़ में शामिल है।

विशेषतापारंपरिक कपास नोटपॉलीमर नोट
टिकाऊपनकम (जल्दी फट जाते हैं)बहुत अधिक (6 गुना ज्यादा जीवनकाल)
सुरक्षामानक सुरक्षा फीचर्सउन्नत और जटिल सुरक्षा फीचर्स
पर्यावरणअधिक संसाधन खपतस्वच्छ और अधिक टिकाऊ
Did You Know?: पॉलीमर नोट कपास आधारित नोटों की तुलना में लगभग छह गुना अधिक लंबे समय तक चलते हैं, जिससे लंबी अवधि में लागत कम होती है।

Frequently Asked Questions

1. भारत में कौन से नोट पॉलीमर से बनाए जाएंगे?
शुरुआती चरण में, आरबीआई 10 और 20 रुपये के नोटों को पॉलीमर से बदलने का प्रस्ताव दे रहा है।

2. पशु वसा (Animal Tallow) का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में धार्मिक संवेदनशीलता के कारण यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि नोटों के निर्माण में किसी भी जानवर के अंश का उपयोग न हो।