भारी एवं मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने कहा है कि कर्नाटक निवेश आकर्षित करने के लिए आंध्र प्रदेश की वित्तीय अनुशासनहीनता वाली नीतियों की नकल नहीं करेगा। उन्होंने पिछले सरकार पर बिना बजट के काम देने का आरोप लगाया।
- मंत्री एम.बी. पाटिल ने आंध्र प्रदेश की निवेश नीतियों को वित्तीय रूप से अनुचित बताया।
- कर्नाटक सरकार उद्योगों को सब्सिडी देने के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखेगी।
- पिछली भाजपा सरकार पर बिना बजट आवंटन के ठेके देने का आरोप लगाया गया।
- छोटे ठेकेदारों के बकाया बिलों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
विजयपुरा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, कर्नाटक के भारी एवं मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने राज्य की औद्योगिक नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्नाटक निवेश को आकर्षित करने के लिए पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश द्वारा अपनाए जा रहे तरीकों की नकल नहीं करेगा, क्योंकि उनमें वित्तीय अनुशासन की कमी है।
पाटिल ने कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू उद्योगों को एक रुपये प्रति एकड़ की दर पर जमीन और 100% सब्सिडी व कर छूट जैसे भारी प्रोत्साहन दे रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि केवल अन्य राज्यों का अनुसरण करने के बजाय, कर्नाटक को अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए विवेकपूर्ण कदम उठाने चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बयान कर्नाटक की एक ऐसी रणनीति को दर्शाता है जहाँ सरकार 'आक्रामक प्रोत्साहन' के बजाय 'सतत विकास' और 'राजकोषीय स्थिरता' को प्राथमिकता दे रही है। यह राज्यों के बीच निवेश की होड़ में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ एक तरफ भारी छूट है और दूसरी तरफ बजट की सुरक्षा।
'निवेश आकर्षित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह राज्य के खजाने की कीमत पर नहीं होना चाहिए।'
मंत्री ने ठेकेदारों की समस्याओं पर भी चर्चा की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने पर्याप्त बजट आवंटन के बिना ही काम के अनुबंध (contracts) जारी कर दिए थे, जिससे ठेकेदारों के बिल लंबे समय तक लंबित रहे। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और लोक निर्माण मंत्री सतीश जरकीहोली इन लंबित भुगतानों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए काम कर रहे हैं।
सतीश जरकीहोली ने भी इस बात की पुष्टि की कि पिछली सरकार ने बिना बजटीय सहायता के 12,000 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य आदेश जारी किए थे। सरकार अब छोटे ठेकेदारों को प्राथमिकता दे रही है और ठेकेदारों के लाइसेंस की अवधि को बढ़ाकर 10 वर्ष करने का निर्णय लिया गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एम.बी. पाटिल ने आंध्र प्रदेश की नीतियों की आलोचना क्यों की?
उत्तर: क्योंकि उनके अनुसार आंध्र प्रदेश की निवेश प्रोत्साहन नीतियां वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं करती हैं।
प्रश्न 2: ठेकेदारों के लिए सरकार की क्या योजना है?
उत्तर: सरकार लंबित बिलों का भुगतान कर रही है और ठेकेदारों के लाइसेंस की अवधि 10 साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।