अमेरिका द्वारा चीनी कपास पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारतीय सूती धागे (cotton yarn) की मांग और कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। निर्यातकों ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार से निर्यात विनियमन की मांग की है।
- अमेरिका द्वारा शिनजियांग कपास पर प्रतिबंध के कारण भारतीय सूती धागे की मांग में भारी वृद्धि हुई है।
- कपास के धागे की कीमतें ₹250 प्रति किलो से बढ़कर ₹400 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।
- निर्यातकों ने कीमतों को स्थिर करने के लिए वाणिज्य और कपड़ा मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है।
- बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका से आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है।
भारतीय परिधान निर्यातकों ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा कपड़ा मंत्रालय से कपास के धागे (cotton yarn) के निर्यात को विनियमित करने का आग्रह किया है। यह मांग अमेरिका द्वारा चीन के शिनजियांग (Uyghur) क्षेत्र से आने वाले कपास पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद आई है, जहां वाशिंगटन ने जबरन श्रम (forced labour) के उपयोग का आरोप लगाया है।
चीन दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का 29% हिस्सा है, जबकि भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अब बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रमुख कपड़ा उत्पादक देशों को अपनी आपूर्ति के लिए भारतीय कपास पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति का असंतुलन पैदा हो गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव का सीधा असर स्थानीय कीमतों पर पड़ता है। Apparel Export Promotion Council (AEPC) के अनुसार, कपास के धागे की कीमतें 2026 की शुरुआत में ₹250 प्रति किलोग्राम से बढ़कर अब लगभग ₹400 प्रति किलोग्राम हो गई हैं। यह 60% की वृद्धि परिधान निर्माण मूल्य श्रृंखला (apparel manufacturing value chain) पर भारी दबाव डाल रही है।
शिनजियांग कपास पर प्रतिबंधों के कारण आपूर्ति श्रृंखला की ट्रेसबिलिटी (traceability) पर जोर दिया जा रहा है, जिससे भारतीय धागे की मांग तेजी से बढ़ी है।
AEPC ने सरकार को चेतावनी दी है कि जिनर्स (ginners) के पास स्टॉक सीमित है और आवक कम हो गई है। इसके परिणामस्वरूप, मिलों को कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की नीलामियों पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है। इसके अलावा, व्यापारियों द्वारा की जा रही जमाखोरी और सट्टेबाजी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वैश्विक संदर्भ
यह संकट केवल मांग-आपूर्ति का नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक व्यापार युद्ध का भी हिस्सा है। अमेरिका ने 'Uyghur Forced Labour Prevention Act' के तहत चीनी कपास पर कड़े नियम लागू किए हैं। इससे पहले, ट्रंप प्रशासन ने भी 'Section 301' टैरिफ का उपयोग करके चीन पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया था। भारत ने भी अपनी विदेश व्यापार नीति (FTP) में संशोधन करते हुए जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
| विशेषता | चीन | भारत |
|---|---|---|
| वैश्विक उत्पादन हिस्सेदारी | ~29% | दूसरा सबसे बड़ा |
| खेती का क्षेत्रफल | ~3.2 मिलियन हेक्टेयर | ~11.2 मिलियन हेक्टेयर |
| उत्पादकता स्तर | उच्च | वैश्विक स्तर पर कम |
Frequently Asked Questions
1. कपास की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिका द्वारा चीनी कपास पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों में भारतीय कपास की मांग बढ़ गई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।
2. AEPC ने सरकार से क्या मांग की है?
AEPC ने विशेष रूप से 20s काउंट और उससे ऊपर के सूती धागे के निर्यात को विनियमित करने और कीमतों को स्थिर करने की मांग की है।