मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने के साथ ही, विशेषज्ञों ने जल संरक्षण के लिए सीधी बुआई (Direct Sowing) अपनाने की सलाह दी है। हालांकि, किसानों का कहना है कि बारिश की कमी के कारण खेत जोतना संभव नहीं है, जिससे यह प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।

  • विशेषज्ञों ने पानी बचाने के लिए पारंपरिक नर्सरी के बजाय सीधी बुआई की वकालत की है।
  • 1 सितंबर को मेट्टूर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा; वर्तमान भंडारण 45 tmc फीट है।
  • 'सुपर अल नीनो' (Super El Nino) के कारण भीषण गर्मी और बाढ़ की आशंका।
  • किसानों ने मिट्टी में नमी की कमी के कारण सरकारी दिशा-निर्देशों की मांग की है।

मंगलवार को मेट्टूर के स्टेनली जलाशय से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की तैयारी के बीच, तमिलनाडु कृषि प्रौद्योगिकी संघ ने साम्बा सीजन के दौरान पानी बचाने के लिए किसानों को सीधी बुआई अपनाने की सलाह दी है। इस संघ में कृषि विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों और तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का समूह शामिल है।

विशेषज्ञों की टीम ने चेतावनी दी है कि मेट्टूर बांध में वर्तमान में लगभग 45 tmc (हजार मिलियन क्यूबिक) फीट पानी जमा है। कर्नाटक से आने वाले पानी के साथ मिलकर यह मात्रा केवल 15 अक्टूबर तक डेल्टा क्षेत्र की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा कर पाएगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि दक्षिण भारत में जलवायु परिवर्तन और जल प्रबंधन का संकट गहरा रहा है। पारंपरिक खेती के तरीकों पर निर्भरता, घटते जल स्तर के समय एक बड़ा जोखिम बन सकती है। सीधी बुआई की सलाह केवल एक तकनीकी सुझाव नहीं है, बल्कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की एक अनिवार्य आवश्यकता है।

चिंता का मुख्य कारण 'सुपर अल नीनो' परिघटना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसके प्रभाव से दक्षिण भारत में भीषण गर्मी और भारी बाढ़ जैसी स्थितियां बन सकती हैं, जिससे मानसून का समय प्रभावित होगा। इसलिए, किसानों को सलाह दी गई है कि वे लंबी अवधि की किस्मों के बजाय मध्यम अवधि (135-140 दिन) की किस्मों का चुनाव करें और सितंबर के अंत तक बुआई पूरी कर लें।

"वर्तमान जल स्तर को देखते हुए रणनीति बदलना आवश्यक है; अल नीनो वर्ष में फसल को विफल होने से बचाने के लिए सीधी बुआई ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है।"

दूसरी ओर, तमिलनाडु के सभी किसान संघों के समन्वय समिति के अध्यक्ष पी.आर. पांडियन ने इस सलाह पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि सीधी बुआई के लिए खेतों की जुताई आवश्यक है, लेकिन बारिश न होने के कारण खेत पूरी तरह सूखे हैं और जुताई करना असंभव है।

विधि पानी की आवश्यकता आवश्यक शर्तें जोखिम कारक
पारंपरिक नर्सरी अधिक खेत में पानी का जमाव जल स्तर में भारी गिरावट
सीधी बुआई कम/मध्यम जुता हुआ खेत/मिट्टी में नमी शुरुआती बारिश पर निर्भर

किसानों का कहना है कि प्रशासन के बीच स्पष्टता की कमी है। वे इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें नर्सरी तैयार करनी चाहिए या सीधी बुआई करनी चाहिए। उन्होंने सरकार से एक विस्तृत एडवाइजरी जारी करने की मांग की है ताकि किसान सही निर्णय ले सकें।

क्या आप जानते हैं?: 1934 में बनकर तैयार हुआ मेट्टूर बांध कावेरी डेल्टा की जीवनरेखा है, जो तमिलनाडु के लाखों एकड़ कृषि क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: नर्सरी विधि की तुलना में सीधी बुआई को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?
सीधी बुआई में पानी की खपत बहुत कम होती है क्योंकि इसमें अलग से नर्सरी तैयार करने और फिर पौधों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 2: सुपर अल नीनो साम्बा सीजन को कैसे प्रभावित करता है?
यह मौसम में अनिश्चितता पैदा करता है, जिससे अत्यधिक गर्मी या अचानक बाढ़ आ सकती है, जो मानसून के चक्र को बाधित करती है।